Monday, March 16, 2026
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जिला अध्यक्ष विजय केशरवानी का मतदाताओं से अपील, हजारों की सभा में बोलें, इस बार कोटा को करें कांग्रेस के हवाले…

बिलासपुर। 14 अगस्त सोमवार का दिन कोटा विधानसभा क्षेत्र के लिए कांग्रेस की राजनीतिक नजरिए से देखें तो ऐतिहासिक रहा। काेटा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली तीन ब्लाक कांग्रेेस कमेटी ने सामूहिक रूप से सदभावना सम्मेलन का आयोजन किया था। कोटा के इतिहास में यह पहली मर्तबे देखने को मिला जब मिट्ठू नवागांव के सम्मेलन में 20 से 25 हजार की भीड़ उमड़ी। स्कूल परिसर ग्रामीणों से खचाखच भरा हुआ था। ग्रामीणों को संबाेधित करते हुए जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विजय केशरवानी ने एक ही अपील की। मार्मिक और राजनीतिक। यह अपील ग्रामीणों के दिल को छू लिया। विजय ने ग्रामीणों ने कहा कि पूरे पांच साल मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस क्षेत्र के लोगों की सेवा की है। विरोधी दल का विधायक होने के बाद भी विकास कार्य में उन्होंने कोई भेदभाव नहीं किया। जब सीएम और राज्य सरकार ने भेदभाव नहीं किया तो आप लोगों की भी जिम्मेदारी बनती है कि कांग्रेस का साथ दीजिए और आने वाले विधानसभा चुनाव में सरकार बनाइए। उनका इतना कहना था कि ग्रामीणों की भारी भीड़ के बीच से जिंदाबाद के नारे लगने शुरू हो गए। विजय की अपील का सकारात्मक और प्रभावी असर भी देखने को मिला। ग्रामीणों ने दोनों हाथ उठाकर कोटा को कांग्रेस के हवाले करने का भरपूर आश्वासन दिया।

स्वतंत्रता दिवस के पूर्व हुए इस आयोजन की विशेषता ये कि सदभावना सम्मेलन में कोटा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांवों और कस्बों से भारी संख्या में ग्रामीण पहुंचे। महिलाओं की उपस्थिति ऐसी कि राजनीतिक पर्यवेक्षक भी देख और सुनकर चौंक गए। बीते विधानसभा चुनाव पर नजर डालें तो कोटा से लगे मरवाही विधानसभा चुनाव में महिला मतदाताओं ने जोर शोर से मतदान किया था। पुरुषों की तुलना में इनका वोट प्रतिशत भी अधिक था। कोटा विधानसभा क्षेत्र के मिट्ठू नवागांव में महिलाओं और युवाओं की प्रभावी उपस्थिति से राजनीतक पंडित भी चौंके बिना नहीं रह सके हैं। ग्रामीणों की मौजूदगी और विजय की सभा के दौरान उनकी बातों को जिस तन्यमता और गंभीरता के साथ सुन और समझ रही थी वह कम चौंकाने वाला नही हैं। उनकी एक-एक बातों और उनके द्वारा उठाए जाने वाले सवालों का बेहद संजीदगी के साथ जवाब भी दे रहे थे और उनकी बातों का पुरजोर तरीके से समर्थन करते भी नजर आ रहे थे। भारी भीड़ के बाद भी अनुशासन ऐसा कि देखते ही बनता था।

सरकार की योजनाओं को एक-एक कर गिनाया
जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विजय केशरवानी ने राज्य शासन की उन सभी योजनाओं को एक-एक कर ग्रामीणों के बीच जिसे लेकर गांव के ग्रामीण से लेकर किसान उत्साहित नजर आए। राज्य शासन और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की महत्वाकांक्षी येाजनाओं को गिनाने के बाद ग्रामीणों के बीच सवाल उछाले,विजय ने ग्रामीणों से पूछा कि कोटा में कांग्रेस का विधायक है या विपक्षी दल का। भीड़ के बीच से आवाज आई विपक्षी दल का विधायक है। विजय ने दूसरा और दमदार सवाल उछाला।जब विराेधी दल का विधायक है तो क्षेत्र में विाकस कार्य कौन करा रहा है। आवाज आई मुख्यमंत्री बघेल,कांग्रेस की सरकार। विजय ने राज्य सरकार के कामकाज की ओर फोकस करते हुए कहा कि जब राज्य सरकार ने आप सबकी बेहतरी,आपके बच्चों की बेहतर भविष्य के लिए राजनीतिक भेदभाव को किनारे रखकर काम किया है तो आपकी जिम्मेदारी क्या बनती है।जब मुख्यमंत्री ने विकास कार्य में भेदभाव नहीं किया है तो आप लोगों की भी जिम्मेदारी तो बनती है ना। महिलाओं ने जोर शोर से दोनों हाथ उठाकर समर्थन किया और विजय के सवालों का सिर हिलाकर जवाब भी दिया। विजय जब अपनी बातें ग्रामीणों के बीच रख रहे थे तब मंच के सामने बैठी विशाल भीड़ कांग्रेस पार्टी जिंदाबाद के नारे भी लगा रही थी।

कोटा और विजय के बीच गहरा नाता
विजय और ग्रामीणों केबीच जब बातचीत के जरिए सीधा संपर्क बन गया तब उन्होंने कोटा और अपने परिवार के बीच के रिश्ते को भी लेकर बात की। कोरोना संक्रमणकाल का जिक्र करते वक्त उनकी जुबान थरथराने लगी।आंखें से आंंसू भी बहने लगे। यह देखकर ग्रामीणों की भीड़ शांतचित्त हो गई और उनकी बातों को चुप सुनते रही। कोरोना के भयावह काल को याद करते हुए उन्होंने अपने और परिवार के ऊपर आए संकट का बयान भी किया। यह वह दौर था जो भुलाए नहीं भूलता। तब माहौल पूरी तरह शांत हो गया था। कोरोना के संक्रमण ने भाई अजय को हमेशा के लिए छीन लिया। मां गंभीर रूप से संक्रमित थी,,खुद भी संक्रमण का शिकार होकर जिंदगी और मौत के बीच जूझते रहे। आप लोगों के आशीर्वाद से मां और मैं ठीक होकर निकले। कोरोना के उस दौर में संक्रमित होने से पहले जरुरतमंदों का सेवा और सहायता करते रहा हूं। विजय ने अपने परिवार को कोटा के करीब बताते हुए कि उनका बचपन कोटा में ही बीता है। अविभाजित मध्यप्रदेश के दौर में पिताजी बीडीओ हुआ करते थे। कोटा के सरकारी बंगले में रहना होता था। प्राथमिक शिक्षा मेेरी कोटा में ही हुई है। अविभाजित मध्यप्रदेश के दौर में जब भाजपा की सरकार बनी तब पिताजी का तबादला मध्यप्रदेश हो गया। उसके बाद हमारा परिवार बिलासपुर में बस गया। पर कोटा का नाम और नाता नहीं छूटा।जब मैं बिलासपुर में कालेज की पढ़ाई कर रहा था उसी दौर में छात्र राजनीति में मेरा प्रवेश हुआ। उस दौर में बिलासपुर के छात्र,छात्र नेता और राजनीति से जुड़े लोग विजय केशरवानी कोटा वाले के नाम से ही जानते थे। कोटा मेरा स्वाभिमान,मेरी पहचान और मेरा सब कुछ है।

जन्मदिन के उपहार में कोटा का मांगा उपहार

अपने और ग्रामीणों के बीच सीधा संपर्क करते हुए विजय ने कहा कि सौभाग्य कहें या फिर संयोग। आज ही मेरा जन्मदिन है। आजतलक मैंने अपना जन्मदिन नहीं मनाया है। ब्लाक के मेरे पदाधिकारी और साथियों का आग्रह मैं नहीं टाल पाया। अधिकारपूर्वक इन सब लोगाें ने आप लोगों के बीच जन्मदिन मनाने का निर्णय ले लिया था। उनके निर्णय में आज मैं आप लोगों के बीच सहभागी बन रहा हूं। विजय ने फिर कहा कि अगर आप लोगों की सहभागिता होगी तो जन्मदिन का केक कटेगा। ग्रामीणों की जैसे सही सहमति मिली पदाधिकारियों ने मंच में केक रख दिया। ग्रामीणों की उपस्थिति के बीच विजय के केक काटी और यहीं एक बड़ी राजनीति भी की। जन्मदिन के उपहार स्वरुप ग्रामीणों से कोटा विधानसभा को कांग्रेस के हिस्से में डालने की अपील की । विजय ने दोटूक कहा कि हमारे नेता जिस किसी को कोटा विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाए इस बार कोटा का गौरव कांग्रेस के विधायक के रूप में लौटाना होगा। राजेंद्र प्रसाद शुक्ल और मथुरा प्रसाद दुबे का स्मरण करते हुए कहा कि कोटा ऐसे दिग्गज नेताओं की कर्मभूमि रही है। उनकी कर्मभूमि और उनके गौरव को वापस लौटाने का समय आ रहा है। विजय ने ग्रामीणों से संकल्प लिया और कोटा को कांग्रेस के हवाले करने की मार्मिक अपील भी की।

स्वस्फूर्त पहुंची ग्रामीणों की भीड़: मिट्ठू नवागांव में ब्लाक कांग्रेस कमेटी के बैनर तले सदभावना सम्मेलन की खास बात ये कि विधानसभा क्षेत्र केे गांव-गांव से ग्रामीणों ने अपनी सहभागिता दर्ज कराई। कोटा विधानसभा क्षेत्र का अधिकांश क्षेत्र वनांचल से जुड़ा हुआ है। सदभावना सम्मेलन में वनांचल से ग्रामीणों की अच्छी खासी सहभागिता रही।

कार्यकर्ताओं में दिखा उत्साह: कोटा विधानसभा क्षेत्र की राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें तो सदभावना शिविर में जितनी भीड़ जुटी आजतलक उतनी भीड़ किसी राजनीतिक सभा व सम्मेलन में नजर नहीं आई। सम्मेलन के बाद इस चर्चा ने जोर पकड़ी। लोगों की जुबान पर मिट्ठू नवागांव का सम्मेलन ही है। सफल सम्मेलन के बाद कोटा, बेलगहना और रतनपुर ब्लाक कांग्रेस कमेटी का सफल प्रबंधन भी सामने आया है। कार्यकर्ताओं में उत्साह का वातावरण भी बना हुआ है। कार्यकर्ता उत्साहित होने के साथ ही बूथों में सक्रिय हो गए हैं। आने वाले दिनों में मिट्ठू नवागांव के सदभावनासम्मेलन का दूरगामी असर दिखाई दे तो अचरज की बात नहीे होनी चाहिए।

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