बिलासपुर। टीकाकरण के बाद दो बच्चों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई, जिससे पूरे जिले में हड़कंप मच गया है। इन घटनाओं के बाद छत्तीसगढ़ के पूर्व डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने अचानक बिलासपुर ज़िला हॉस्पिटल पहुँचकर पीड़ित बच्चों के परिवारों से मुलाकात की और उनकी स्थिति का जायजा लिया। सिंहदेव ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए राज्य सरकार से इस मामले की तत्काल जाँच की माँग की है।
कोटा ब्लाक अंतर्गत ग्राम पटैता के कोरोपारा में हुए एक दुखद हादसे ने स्वास्थ्य विभाग को हिला कर रख दिया है। यहां नियमित टीकाकरण के तहत बीसीजी (तपेदिक) का टीका लगाने के बाद दो नवजात बच्चों की मौत हो गई और छह अन्य बच्चे गंभीर रूप से बीमार हो गए। शुक्रवार की सुबह, आंगनबाड़ी केंद्र में कुल आठ बच्चों को बीसीजी का टीका लगाया गया था। टीका लगाने के कुछ घंटे बाद ही दो बच्चों की हालत गंभीर हो गई और अगले ही दिन उनकी मृत्यु हो गई। बाकी छह बच्चों की भी तबीयत बिगड़ने लगी, जिन्हें तुरंत जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बच्चों के चेहरों का नीला पड़ना और तेजी से उनकी हालत बिगड़ना टीके के साइड इफेक्ट के संकेत माने जा रहे हैं।

सिंहदेव की प्रमुख मांगें:
1. जाँच की माँग: सिंहदेव ने बच्चों की मौत की गहन जाँच की माँग की है। उन्होंने सवाल उठाया कि कहीं टीकाकरण में इस्तेमाल की गई दवाई अमानक तो नहीं थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसी संभावना को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता और अगर दवाई में कोई खामी थी, तो इसके पूरे स्टॉक को तत्काल प्रभाव से रोका जाना चाहिए।
2. पोस्टमार्टम पर सवाल: सिंहदेव ने यह भी सवाल उठाया कि बच्चों का पोस्टमार्टम क्यों नहीं करवाया गया। उन्होंने कहा कि इस मामले में सरकार का दायित्व था कि वह सही तरीके से जाँच कराए और सत्य को सामने लाए। पोस्टमार्टम न करवाने से यह संदेह उत्पन्न होता है कि कहीं सरकार कुछ छुपाने की कोशिश तो नहीं कर रही है।
3. संवेदनाएँ और इलाज: सिंहदेव ने मृतक बच्चों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और ज़िला अस्पताल में बाकी बच्चों का इलाज बेहतर तरीके से करने की अपील की। उन्होंने सुनिश्चित करने की माँग की कि भविष्य में ऐसी घटनाएँ न हों और हर संभव प्रयास किए जाएँ कि टीकाकरण प्रक्रिया सुरक्षित और प्रभावी हो।
पूर्व विधायक शैलेश पांडेय का बयान
इस घटना के बाद बिलासपुर के पूर्व विधायक शैलेश पांडेय ने भी बीजेपी सरकार पर तीखे हमले किए। उन्होंने कहा कि यह वही सरकार है जिसके कार्यकाल में नसबंदी, गर्भाशय निकालने और आँख फोड़ने जैसी घटनाएँ हुईं हैं। पांडेय ने कहा कि वर्तमान स्थिति में कुछ भी हो सकता है और सरकार को बच्चों की मौत के पीछे की सच्चाई को सामने लाने के लिए जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
बिलासपुर में हुई इस दुखद घटना ने न केवल सरकार के कामकाज पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि आम जनता में भी भय और आक्रोश का माहौल बना दिया है। सिंहदेव और पांडेय जैसे विपक्षी नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया इस बात का संकेत है कि इस मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। राज्य सरकार को चाहिए कि वह पारदर्शिता के साथ इस मामले की जाँच कराए और दोषियों को सज़ा दिलाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएँ न हों और जनता का सरकार पर विश्वास बना रहे।


