छत्तीसगढ़, रायपुर। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर वीडियो के माध्यम से गंभीर आरोप लगाते हुए भाजपा और पुलिस प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा द्वारा शिक्षण संस्थानों में सदस्यता अभियान की आड़ में छात्रों से अवैध वसूली की जा रही है। इस वसूली के खिलाफ़ एनएसयूआई (नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया) ने जब विरोध दर्ज कराया, तो भाजपा के असामाजिक तत्वों ने हिंसात्मक रवैया अपनाया और लड़ाई-झगड़े की स्थिति उत्पन्न की।
दीपक बैज ने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन भाजपा के कार्यकर्ताओं के समान काम कर रहा है और एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं के खिलाफ़ एकपक्षीय कार्रवाई कर रहा है। बैज के अनुसार, एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं द्वारा उठाए गए मुद्दों को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है, और भाजपा के असामाजिक तत्वों के खिलाफ कोई सख्त कदम नहीं उठाया जा रहा। उन्होंने पुलिस प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि हर बार पुलिस “ऊपर से ऑर्डर” का हवाला देती है, जिससे स्पष्ट होता है कि सरकारी प्रशासन भाजपा के दबाव में काम कर रहा है।
दीपक बैज ने बताया कि वे स्वयं सरस्वती नगर थाने में 5 घंटे तक धरने पर बैठे रहे, जब तक पुलिस ने भाजपा के कार्यकर्ताओं के खिलाफ़ एफआईआर दर्ज नहीं की। उनका कहना है कि भाजपा के गुंडों द्वारा की गई हिंसा और असामाजिक गतिविधियों के खिलाफ़ पुलिस प्रशासन शुरू में कोई कार्रवाई करने को तैयार नहीं था। कांग्रेस और एनएसयूआई के दबाव के बाद ही पुलिस ने मजबूरन एफआईआर दर्ज की।
सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें कथित तौर पर भाजपा समर्थक और पुलिस की मिलीभगत का आरोप लगाया जा रहा है। कांग्रेस का कहना है कि पुलिस ने भाजपा के गुंडों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने में अनिच्छा दिखाई, और जब तक कांग्रेस नेताओं ने धरना नहीं दिया, तब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।
दीपक बैज ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ में लगातार विपक्ष को टारगेट किया जा रहा है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ़ है। उन्होंने भाजपा सरकार के इस रवैये को निंदनीय बताया और कहा कि विपक्ष की आवाज़ को दबाने के लिए सरकारी तंत्र का दुरुपयोग किया जा रहा है। उनका कहना है कि इस तरह की घटनाएं राज्य में राजनीतिक अस्थिरता और असंतोष को बढ़ावा दे रही हैं।
दीपक बैज का यह बयान छत्तीसगढ़ की राजनीति में हलचल मचा रहा है। भाजपा पर लगाए गए आरोप और पुलिस प्रशासन की भूमिका पर उठाए गए सवालों ने राज्य की राजनीतिक स्थिति को और भी जटिल बना दिया है। इस घटना से स्पष्ट होता है कि राज्य में राजनीतिक दलों के बीच संघर्ष गहराता जा रहा है, और आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर अपनी आवाज़ बुलंद करने का संकेत दिया है, और आने वाले समय में और भी कड़े कदम उठाने की संभावना जताई है।


