बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने राज्य की सड़कों पर आवारा मवेशियों के कारण हो रही दुर्घटनाओं पर गंभीरता से स्वतः संज्ञान लिया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने इस मुद्दे पर बुधवार को सुनवाई की। सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने मवेशी मुक्त सड़कों की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं।
बिलासपुर के तखतपुर क्षेत्र के बेलसरी गांव में 21 अक्टूबर, 2024 को एक दर्दनाक घटना सामने आई थी, जिसमें हाईवा वाहन ने मवेशियों को कुचल दिया। इस घटना के बाद राज्य में मवेशियों की उपस्थिति के कारण होने वाली सड़क दुर्घटनाओं पर हाई कोर्ट की विशेष चिंता प्रकट हुई। न्यायाधीशों ने कहा कि यह घटना बेहद दुखद और अस्वीकार्य है, और इसे रोकने के लिए ठोस उपाय करने की जरूरत है।
सुनवाई के दौरान, मुख्य न्यायाधीश ने संबंधित विभागों की इस मुद्दे पर निष्क्रियता और उचित रोडमैप न तैयार करने पर नाराजगी जताई। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि मवेशियों के कारण सड़कों पर दुर्घटनाओं की समस्या अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने टिप्पणी की कि, “आप 8 साल भी ले लें, लेकिन सड़कों पर मवेशी नहीं दिखने चाहिए।”
हाई कोर्ट ने इस गंभीर समस्या को हल करने के लिए सरकार से ठोस रोडमैप और क्रियान्वयन योजना मांगी है। राज्य के महाधिवक्ता ने कोर्ट से समय की मांग करते हुए 8 हफ्ते का समय लिया, जिस पर मुख्य न्यायाधीश ने नाखुशी जाहिर की और कहा कि सरकार को तत्काल कार्रवाई करनी होगी।
हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 25 नवंबर, 2024 को तय की है। कोर्ट ने महाधिवक्ता के माध्यम से राज्य सरकार को मवेशी मुक्त सड़कों के लिए कार्ययोजना प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट का यह सख्त रुख इस ओर इशारा करता है कि अगर समय पर उचित कदम नहीं उठाए गए, तो इस मामले में और भी कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
हाई कोर्ट की इस पहल से उम्मीद है कि छत्तीसगढ़ की सड़कों पर मवेशियों की मौजूदगी और उसके कारण होने वाली दुर्घटनाओं को रोका जा सकेगा। यह कदम सड़कों को सुरक्षित बनाने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण दिशा में उठाया गया है।
अब देखने की बात होगी कि राज्य सरकार इस मुद्दे पर कितनी जल्दी और प्रभावी कार्रवाई करती है, और क्या मवेशियों से मुक्त सड़कें जल्द ही छत्तीसगढ़ में देखने को मिलेंगी।