बिलासपुर। विकास भवन में शुक्रवार को आयोजित मेयर इन काउंसिल (एमआईसी) की बैठक में अवैध कब्जा हटाने के मुद्दे को लेकर जमकर विवाद हुआ। एक जनप्रतिनिधि और अधिकारी के बीच इस विषय पर बहस इतनी बढ़ गई कि बैठक का माहौल तनावपूर्ण हो गया। अधिकारियों पर लगातार अवैध कब्जा हटाने में लापरवाही का आरोप लगाते हुए जनप्रतिनिधि ने नाराजगी जाहिर की। बैठक में उपस्थित एमआईसी सदस्य और जनप्रतिनिधियों ने बाद में किसी भी विवाद से इंकार किया, लेकिन बैठक के दौरान हुए हंगामे की चर्चा पूरे शहर में रही।
अवैध कब्जा हटाने में ढिलाई पर उठा विवाद
शुक्रवार को एमआईसी की इस महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन शहर के विकास कार्यों को लेकर किया गया था। कुल 90 एजेंडों पर चर्चा हुई और इन्हें सामान्य सभा में स्वीकृत कराने के लिए प्रस्तावित किया गया। बैठक में निगम के एक जनप्रतिनिधि ने अवैध कब्जा हटाने के काम में देरी पर कड़ा एतराज जताया। आरोप लगाया गया कि संबंधित अधिकारी को कई बार इस विषय में कार्रवाई करने के लिए कहा गया, लेकिन इसके बावजूद ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। इस आरोप के बाद दोनों के बीच बहस ने तूल पकड़ लिया।
आरोप-प्रत्यारोप के बीच उठा सवाल
विवाद बढ़ने पर अधिकारियों पर कामकाज में अनियमितता और लापरवाही का भी आरोप लगा। जनप्रतिनिधि का कहना था कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद अधिकारी कब्जा हटाने की कार्रवाई में ढिलाई बरत रहे हैं। बैठक में कई अन्य मुद्दों पर भी कार्यप्रणाली की आलोचना की गई और यह सवाल उठाया गया कि निगम अपने कामों को किस तरह से निभा रहा है। इसी हंगामे के बीच बैठक का समापन हुआ।
एमआईसी सदस्यों ने किया विवाद से इंकार
हालांकि, बैठक समाप्त होने के बाद एमआईसी सदस्यों और जनप्रतिनिधियों ने इस विवाद को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की और विवाद होने से इंकार किया। फिर भी शहर में इस बैठक के दौरान हुए हंगामे की चर्चाएं जोरों पर हैं। कई लोग इसे प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय की कमी का संकेत मान रहे हैं।
अवैध कब्जा हटाने के मुद्दे पर उठे इस विवाद ने एमआईसी बैठक के माहौल को गरमा दिया और प्रशासनिक ढांचे की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए। इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि शहर के विकास और जनहित के कार्यों में तेजी लाने के लिए प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता है, ताकि जनहित के कार्य समय पर और सही तरीके से पूरे हो सकें।


