Thursday, March 12, 2026
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बिलासपुर: हेड कांस्टेबल से जान का खतरा: पुलिसकर्मी के परिवार ने मांगी सुरक्षा, विवाद के बीच प्रमोशन पर भी सवाल… 

बिलासपुर। परसदा का जोशी परिवार अपने ही विभाग के एक प्रधान आरक्षक से जान का खतरा महसूस कर रहा है। परिवार ने बार-बार की गई शिकायतों के बावजूद पुलिस विभाग से सहयोग न मिलने का आरोप लगाते हुए, बिलासपुर प्रेस क्लब में न्याय की गुहार लगाई। यह परिवार सकरी बटालियन में कार्यरत हेड कांस्टेबल संजय जोशी का है, जिनके परिवार को प्रधान आरक्षक अरुण कमलवंशी से खतरा बताया जा रहा है।

संजय जोशी की पत्नी सरोज का प्रेम संबंध प्रधान आरक्षक अरुण कमलवंशी से था। अरुण पूर्व में सिविल लाइन सीएसपी का रीडर रह चुका है और अब पुलिस लाइन में कार्यरत है। संजय की अनुपस्थिति में अरुण उनके घर आता-जाता था। एक दिन संजय ने अरुण और सरोज को आपत्तिजनक स्थिति में देखा, जिससे पति-पत्नी के बीच विवाद हुआ और अरुण वहां से भाग निकला। इसके बाद सरोज ने अपने घर को छोड़ दिया और अरुण के साथ रहने लगी।

संजय ने तलाक के लिए कुटुंब न्यायालय में मामला दर्ज किया, जिसे मंजूरी मिल गई। तब से अरुण और जोशी परिवार के बीच रंजिश की स्थिति बनी हुई है। परिवार का दावा है कि अरुण परिवार को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहा है। जोशी परिवार के अनुसार, पिछले कुछ महीनों से एक सफेद कार, बिना नंबर प्लेट के, उनके घर के पास मंडराती रहती है। यह कार कभी 15-20 मिनट तो कभी एक घंटे तक घर के सामने खड़ी रहती है, लेकिन कोई उसमें से बाहर नहीं उतरता।

जोशी परिवार ने पिछले साल 25 दिसंबर को अरुण द्वारा उनके घर में तोड़फोड़ और आगजनी का आरोप लगाया था, जिसकी शिकायत सकरी थाने में की गई। लेकिन इस शिकायत पर तुरंत कोई कार्रवाई नहीं की गई। एक महीने तक लगातार थाने के चक्कर काटने के बाद एफआईआर दर्ज हुई। इसके बाद 10 अप्रैल 2024 को अरुण की शिकायत पर जोशी परिवार के खिलाफ भी मामला दर्ज हो गया, जिससे पीड़ित परिवार को दोहरी परेशानी का सामना करना पड़ा।

जोशी परिवार का दावा है कि अरुण कमलवंशी पहले से शादीशुदा है और उसने अपनी पहली पत्नी को तलाक दिए बिना ही सरोज के साथ दूसरी शादी की है। कुटुंब न्यायालय के तलाक मामले में संजय जोशी ने इसे साबित भी किया। पुलिस विभाग को इस तथ्य की जानकारी दी गई, लेकिन विभाग ने अब तक अरुण के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। जबकि सिविल सेवा नियमों के तहत इस मामले में निलंबन से लेकर बर्खास्तगी तक की कार्रवाई हो सकती थी।

जोशी परिवार का आरोप है कि अरुण की विभागीय पहुंच के कारण उसके खिलाफ चल रही जांच के बावजूद उसे 5 अगस्त 2024 को प्रमोशन मिला। उसे आरक्षक से प्रधान आरक्षक बना दिया गया, जबकि उसके खिलाफ हाईकोर्ट में मामला विचाराधीन है। हाईकोर्ट केस (WPS 8915/2023) में अरुण के खिलाफ विभागीय जांच और सेवा से बर्खास्तगी की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन पिछली तीन सुनवाइयों में वह अदालत में उपस्थित नहीं हुआ है।

जोशी परिवार ने जिला और पुलिस प्रशासन से अरुण के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि अरुण कमलवंशी की वजह से उनका जीवन संकट में है और पुलिस विभाग द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। परिवार ने अपनी सुरक्षा के लिए भी प्रशासन से गुहार लगाई है, ताकि वे सुरक्षित महसूस कर सकें और न्याय प्राप्त कर सकें।

यह मामला पुलिस विभाग के भीतर अनुशासनहीनता और पक्षपात का गंभीर उदाहरण प्रस्तुत करता है। एक पीड़ित पुलिसकर्मी का परिवार न्याय और सुरक्षा के लिए संघर्ष कर रहा है, जबकि आरोपी विभागीय समर्थन का फायदा उठाता प्रतीत होता है। ऐसे मामलों में पुलिस प्रशासन की निष्पक्षता और कार्रवाई की मांग आवश्यक है, ताकि न्याय की स्थापना हो सके और विभाग की साख बनी रहे।

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