बिलासपुर-रायपुर हाईवे से तिफरा औद्योगिक क्षेत्र के सेक्टर डी यदुनंदन नगर को जोड़ने वाली 30 मीटर चौड़ी सड़क, जो मास्टर प्लान का हिस्सा है, बीते कुछ वर्षों से विवादों के घेरे में है। स्थानीय बिल्डर और कॉलोनाइजर द्वारा इस सार्वजनिक मार्ग को बार-बार निजी संपत्ति बताकर बंद करने की घटनाएं आम हो गई हैं। इस स्थिति ने न केवल स्थानीय नागरिकों की दिनचर्या प्रभावित की है, बल्कि क्षेत्र में दुर्घटनाओं और असुविधाओं की स्थिति भी पैदा कर दी है।
यदुनंदन नगर, साई विहार, सूर्या विहार, पंचशील कॉलोनी और विजय विहार जैसी कई कॉलोनियों के लगभग 12,000 से अधिक निवासी इस मार्ग का उपयोग करते हैं। मार्ग बंद होने से आवागमन बाधित होता है और लोगों को वैकल्पिक, लंबा रास्ता अपनाना पड़ता है। पिछले दिनों इस विवादित मार्ग पर खुदाई कर दी गई, जिससे एक कार और तीन बाइक दुर्घटनाग्रस्त हो गईं।
विवाद की जड़ और कानूनी स्थिति
1. मास्टर प्लान में दर्ज है सड़क: कॉलोनाइजर ने 2003 में प्लॉटिंग की अनुमति प्राप्त की थी, जिसमें इस सड़क को 30 मीटर चौड़ा दिखाया गया था।
2. टीएससी अनुमति निरस्त: कॉलोनाइजर की अनुमति 2007 में ही रद्द कर दी गई थी। इसके बावजूद उन्होंने बुनियादी सुविधाओं जैसे पानी, बिजली, सड़क, और नाली निर्माण का ध्यान नहीं रखा।
3. हाई कोर्ट का निर्देश: वर्ष 2023 में हाई कोर्ट के आदेश के बाद इस मार्ग का निर्माण शुरू हुआ, लेकिन कॉलोनाइजर ने इसे निजी भूमि बताकर फिर से आपत्ति दर्ज की और काम बंद करवा दिया।
प्रशासन की उदासीनता
नगर निगम प्रशासन को इस मामले में लिखित आवेदन और दस्तावेज सौंपे गए थे। इसमें यह स्पष्ट किया गया कि इस मार्ग का उपयोग वैध और मास्टर प्लान के अनुरूप है। निगम के पास इस कॉलोनी की सभी फाइलें और दस्तावेज पहले से मौजूद हैं। बावजूद इसके, अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
सड़क निर्माण की आवश्यकता
इस मार्ग को खुलवाने और इसे पक्की सड़क बनाने से कई लाभ होंगे:
1. आवागमन सुगम होगा: नागरिकों को मुख्य मार्ग का उपयोग करने में सुविधा होगी।
2. ट्रैफिक प्रबंधन में सुधार: तिफरा बस्ती में अक्सर जाम की स्थिति बनी रहती है। इस वैकल्पिक मार्ग से ट्रैफिक दबाव कम होगा।
3. कॉलोनाइजर की मनमानी पर रोक: इस मार्ग के सार्वजनिक उपयोग को मान्यता मिलने से बिल्डर और कॉलोनाइजर की अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगेगा।
निवासियों की अपील
प्रभावित नागरिकों ने जिला प्रशासन से अपील की है कि इस मामले की जांच कर दोषी बिल्डर पर कार्रवाई की जाए। सड़क को पुनः सार्वजनिक मार्ग के रूप में स्थापित किया जाए, ताकि क्षेत्र के नागरिक बिना किसी परेशानी के आवागमन कर सकें।
यह कहना गलत नहीं होगा कि प्रशासन और न्यायिक व्यवस्था की सख्ती से इस तरह की समस्याओं को रोका जा सकता है। जनता की आवाज को अनसुना करना और बिल्डरों की मनमानी को बढ़ावा देना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।


