बिलासपुर जिले के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र, सिरगिट्टी, तिफरा और सिलपहरी में स्थित उद्योगों द्वारा भू-भाटक एवं संधारण शुल्क का भुगतान न किए जाने के कारण प्रशासन द्वारा सख्त कार्रवाई की जा रही है। छत्तीसगढ़ शासन के वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव द्वारा इस मुद्दे की लगातार समीक्षा की जा रही है, जिससे बकाया राशि की वसूली में तेजी लाई जा सके।
जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र के मुख्य महाप्रबंधक द्वारा बकाया राशि की वसूली के लिए उद्योगों को लगातार नोटिस जारी किए जा रहे हैं। इसके बावजूद, यदि वार्षिक देयक राशि का भुगतान नहीं किया जाता है, तो औद्योगिक इकाइयों को आबंटित भूखंड निरस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। पिछले एक माह में प्रशासन ने चार उद्योगों की लीजडीड रद्द कर दी है।
अब तक की वसूली और लंबित राशि
प्रशासन की सख्त कार्रवाई के कारण, एक माह में उद्योगों से कुल ₹3,62,82,000 की राशि वसूल की गई है। हालाँकि, अब भी लगभग 300 उद्योगों से ₹10 करोड़ की राशि लंबित है, जिसे छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम (CSIDC) को भुगतान किया जाना है।
दंड एवं शास्ति की व्यवस्था
भू-भाटक एवं संधारण शुल्क का भुगतान हर वर्ष 10 जनवरी तक किया जाना अनिवार्य है। नियमानुसार, समय पर भुगतान न करने वाले उद्योगों पर 12 प्रतिशत से 24 प्रतिशत तक की अर्थदंड/शास्ति लगाई जाती है, जो ऑनलाइन ही जनरेट होती है। इसके अलावा, यदि कोई उद्योग समय पर भुगतान नहीं करता है, तो उद्योग विभाग से संबंधित कोई भी कार्य उस इकाई के लिए नहीं किया जाएगा।
उद्योगपतियों से अपील
मुख्य महाप्रबंधक और CSIDC, बिलासपुर के पदेन मुख्यमहाप्रबंधक ने उद्योगपतियों से अपील की है कि वे अपनी औद्योगिक इकाइयों से संबंधित वार्षिक देय राशियों का भुगतान तुरंत ऑनलाइन करें। भुगतान से संबंधित किसी भी कठिनाई के समाधान के लिए CSIDC के शाखा कार्यालय, तिफरा या जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र, बिलासपुर के मुख्य महाप्रबंधक से संपर्क किया जा सकता है।
सम्पर्क विवरण
उद्योगों को यदि भुगतान में कोई कठिनाई आ रही हो, तो वे निम्नलिखित अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं:
- नाम: ए. श्रीधर राव, प्रबंधक
- मोबाइल नंबर: 7587097969
प्रशासन द्वारा की जा रही सख्त कार्रवाई से यह स्पष्ट हो जाता है कि बकाया भू-भाटक एवं संधारण शुल्क की वसूली को लेकर किसी भी प्रकार की ढील नहीं दी जाएगी। उद्योगपतियों के लिए यह आवश्यक हो गया है कि वे समय पर अपने देयकों का भुगतान करें, ताकि उनकी औद्योगिक गतिविधियाँ निर्बाध रूप से चलती रहें।


