बिलासपुर। कांग्रेस पार्टी में अंतर्कलह खुलकर सामने आ गई है। कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव और जिला कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष विजय केसरवानी के बीच जारी विवाद ने संगठन को असमंजस की स्थिति में डाल दिया है। ताजा घटनाक्रम में जिला अध्यक्ष ने विधायक अटल श्रीवास्तव को निष्कासित करने की अनुशंसा की, जिसके बाद यह टकराव और तेज हो गया।
विधायक अटल श्रीवास्तव ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि जिला अध्यक्ष बेलगाम हो गए हैं और उनकी कार्यशैली कांग्रेस की साख को नुकसान पहुंचा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि टिकट वितरण से लेकर निष्कासन तक, हर मोर्चे पर गड़बड़ी की जा रही है। उन्होंने सीधे तौर पर विजय केसरवानी को चुनौती देते हुए कहा कि यदि वह कांग्रेस भवन में होने वाली हार की समीक्षा बैठक में आते हैं, तो उनके हजारों समर्थकों के सामने सारी सच्चाई उजागर हो जाएगी।
अटल श्रीवास्तव ने जिला अध्यक्ष विजय केसरवानी के साथ-साथ शहर अध्यक्ष विजय पांडेय पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि नगरीय निकाय चुनाव में पार्षदों के टिकट वितरण में भारी अनियमितता हुई है। बिना अधिकृत सूची के ही पार्षदों के नाम घोषित कर दिए गए। जब आधिकारिक सूची रात में आई, तो उसमें भी मनमाने ढंग से नामों को हटा दिया गया।
विधायक श्रीवास्तव का दावा है कि पार्षद प्रत्याशियों की सूची प्रदेश कांग्रेस कमेटी से आती है, लेकिन जिला और शहर अध्यक्षों ने अपने स्तर पर ही इसे जारी कर दिया। इससे पार्टी कार्यकर्ताओं में भारी असंतोष है। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि दोषियों को उचित दंड मिले।
हाल ही में विधायक अटल श्रीवास्तव के “चपरासी भी कलेक्टर को निकाल रहे” वाले बयान पर भी विवाद खड़ा हुआ था। इस पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि उनका बयान तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है, लेकिन यह जरूर कहा कि जिला और शहर अध्यक्षों की कार्यशैली की जांच होनी चाहिए ताकि संगठन में पारदर्शिता बनी रहे।
बिलासपुर कांग्रेस की इस अंदरूनी लड़ाई ने पार्टी के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ऐसे समय में इस तरह का टकराव पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा सकता है। अब देखना होगा कि प्रदेश नेतृत्व इस विवाद को कैसे सुलझाता है और संगठन में एकजुटता कैसे बनाए रखता है।