बलौदाबाजार हिंसा मामले में कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी, जिससे कांग्रेस कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर दौड़ गई। यादव लंबे समय से इस मामले में जमानत पाने के लिए प्रयासरत थे और आखिरकार उन्हें न्यायालय से राहत मिल गई।
क्या था पूरा मामला?
मई 2024 में बलौदाबाजार के गिरौधपुरी धाम में सतनामी समाज के धार्मिक स्थल पूज्य जैतखाम में कुछ असामाजिक तत्वों ने तोड़फोड़ की थी। इस घटना के बाद सतनामी समाज के लोगों ने बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई। मामले को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने तुरंत जांच के आदेश दिए और आरोपियों पर कार्रवाई की।
कैसे बढ़ा मामला?
10 जून 2024 को सतनामी समाज के लोगों ने जैतखाम में हुई तोड़फोड़ के विरोध में कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन किया। देखते ही देखते यह विरोध उग्र हो गया और उपद्रवियों ने एसपी कार्यालय में आग लगा दी। इस दौरान कई वाहन जलकर खाक हो गए और सरकारी संपत्तियों को भारी नुकसान हुआ। इस हिंसा में सरकारी संपत्तियों को करीब 12.53 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचा था।
देवेंद्र यादव पर आरोप और गिरफ्तारी
इस मामले में सरकार ने कई लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की। कांग्रेस नेता और भिलाई से विधायक देवेंद्र यादव को भी इस हिंसा का आरोपी बनाया गया। पुलिस ने उनके खिलाफ 449 पन्नों का विस्तृत अभियोग पत्र तैयार कर न्यायालय में पेश किया। उन पर हिंसा, आगजनी, और दंगा फैलाने के गंभीर आरोप लगाए गए। इसके बाद 17 अगस्त 2024 को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
कांग्रेस का विरोध और सुप्रीम कोर्ट का फैसला
देवेंद्र यादव की गिरफ्तारी के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। उनकी जमानत के लिए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में कई बार याचिका दायर की गई, लेकिन राहत नहीं मिली। आखिरकार, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जहां से उन्हें जमानत मिल गई।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर
सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह देखा गया। देवेंद्र यादव के समर्थन में कई नेताओं और समर्थकों ने इसे न्याय की जीत बताया।
बलौदाबाजार हिंसा मामला छत्तीसगढ़ की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन गया था। इस पर अब आगे क्या कदम उठाए जाएंगे, यह देखने वाली बात होगी।