बिलासपुर के सरकंडा थाना क्षेत्र के लगरा ग्राम पंचायत में दूसरे चरण के मतदान के बाद मतगणना के दौरान हिंसा भड़क उठी। हार से आक्रोशित प्रत्याशी और उनके समर्थकों ने मतगणना स्थल पर हंगामा किया और पुनर्मतगणना की मांग को लेकर अधिकारियों से तीखी बहस करने लगे। जैसे-जैसे विवाद बढ़ा, मामला हिंसक हो गया, और गुस्साए समर्थकों ने मतदान दल पर हमला कर दिया। इस दौरान तैनात पुलिस बल को भी नहीं बख्शा गया और उन पर जमकर पथराव किया गया। इस हमले में तीन पुलिसकर्मी घायल हो गए, जबकि दो से अधिक गाड़ियां क्षतिग्रस्त हो गईं।
यह घटना तब हुई जब मतगणना अपने अंतिम चरण में थी। चुनाव परिणाम प्रत्याशी के खिलाफ जाने से उनके समर्थकों में आक्रोश फैल गया और उन्होंने अधिकारियों से बहस शुरू कर दी। विवाद बढ़ने पर समर्थक उग्र हो गए और उन्होंने मतगणना स्थल पर हंगामा करना शुरू कर दिया। देखते ही देखते स्थिति हिंसक हो गई और पत्थरबाजी शुरू हो गई। इस दौरान मतदान दल को बंधक बना लिया गया और पुलिसकर्मियों पर भी हमला कर दिया गया।

इस हिंसा से पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। लोगों में दहशत का माहौल बन गया और कई लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। घटना की सूचना मिलते ही अतिरिक्त पुलिस बल मौके पर पहुंचा और हालात को काबू में किया।
पुलिस ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए 14 नामजद समेत 100 से अधिक लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस बल लगातार क्षेत्र में गश्त कर रहा है ताकि कोई और अप्रिय घटना न हो।
बिलासपुर के लगरा में हुई इस घटना ने चुनावी प्रक्रिया के दौरान बढ़ती हिंसा पर एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है। लोकतंत्र में निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव महत्वपूर्ण होते हैं, लेकिन इस प्रकार की घटनाएं लोकतांत्रिक मूल्यों को ठेस पहुंचाती हैं। प्रशासन को चाहिए कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए कड़े कदम उठाए जाएं।
बिलासपुर के लगरा में हुई इस हिंसा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि चुनावों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। हालांकि पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में कर लिया है, लेकिन इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस रणनीति बनाना आवश्यक है।


