बिलासपुर की कांग्रेस राजनीति में घमासान जारी है। कोटा विधानसभा क्षेत्र के विधायक अटल श्रीवास्तव और बागी कांग्रेस नेता रमेश सूर्या के बीच विवाद अब सड़क से होते हुए थाने तक पहुंच गया है। पंचायत चुनाव में बागी प्रत्याशी रहे रमेश सूर्या ने विधायक पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसके बाद मामला और गरमा गया है।
बागी नेता रमेश सूर्या ने कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव पर आरोप लगाया कि उन्होंने हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी देवेंद्र यादव को हराने की साजिश रची थी। सूर्या के अनुसार, विधायक श्रीवास्तव ने अपने करीबी सुदीप श्रीवास्तव को निर्दलीय चुनाव लड़वाकर कांग्रेस के वोट काटे। इसके अलावा, उन्होंने कांग्रेस समर्थकों को खुलकर काम करने से रोका और अपने समर्थकों के साथ मिलकर पार्टी कार्यकर्ताओं के खिलाफ षड्यंत्र रचा।
इस गुस्से के चलते रमेश सूर्या ने रतनपुर में विधायक अटल श्रीवास्तव का पुतला दहन कराया। उनका कहना है कि कांग्रेस की हार के लिए विधायक की गुटबाजी और साजिशें जिम्मेदार हैं।
विधायक समर्थकों ने की एफआईआर की मांग
रमेश सूर्या के इस विरोध प्रदर्शन के बाद विधायक अटल श्रीवास्तव के समर्थक भी हरकत में आ गए। उन्होंने रतनपुर थाने पहुंचकर रमेश सूर्या के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की। उनका आरोप है कि सूर्या ने पार्टी के अनुशासन को तोड़ा और बिना प्रशासनिक अनुमति के पुतला दहन कर कानून व्यवस्था को चुनौती दी। समर्थकों ने कहा कि इस तरह के कृत्य से पार्टी की छवि धूमिल हो रही है और यह अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
थाना प्रभारी ने मामले की जांच कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
कांग्रेस में गुटबाजी से बढ़ी तकरार
बिलासपुर कांग्रेस में गुटबाजी लंबे समय से चर्चा में रही है। लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद यह विवाद और तेज हो गया है। पार्टी के अंदर चल रही तनातनी अब खुलकर सामने आ रही है। एक तरफ विधायक अटल श्रीवास्तव पर गुटबाजी और पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप लग रहे हैं, तो दूसरी ओर बागी नेताओं के तेवर भी कांग्रेस संगठन को कमजोर कर रहे हैं।
इस विवाद का असर आगामी स्थानीय निकाय चुनावों और विधानसभा चुनावों पर पड़ सकता है। अगर पार्टी जल्द ही भीतरखाने चल रही कलह को शांत नहीं करती, तो आने वाले दिनों में यह संकट और गहरा सकता है।
क्या कांग्रेस इस संकट से उबर पाएगी?
इस पूरे घटनाक्रम ने कांग्रेस के भीतर अनुशासन और नेतृत्व क्षमता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक ओर पार्टी को एकजुट होकर आगे बढ़ने की जरूरत है, वहीं अंदरूनी खींचतान उसकी संभावनाओं को कमजोर कर सकती है। अब देखना होगा कि कांग्रेस नेतृत्व इस विवाद को कैसे सुलझाता है और क्या पार्टी में अनुशासन कायम हो पाता है या नहीं।