बिलासपुर (रतनपुर ): रतनपुर स्थित ऐतिहासिक महामाया मंदिर एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार धार्मिक आस्था और श्रद्धा के केंद्र में कोई धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मंदिर परिसर स्थित कुंड में हुई की कछुआ है। की मौत को लेकर उठे विवाद ने मंदिर प्रबंधन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। 25 मार्च को लगभग 23 कछुओं की मौत की खबर सामने आते ही चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया।
चूंकि कछुए संरक्षित प्रजाति दुर्लभ ब्लैक सॉफ्टशेल टर्टल शेड्यूल 1 में आते हैं, इसलिए इस मामले ने संवेदनशील रूप ले लिया और हाई कोर्ट ने भी इसका संज्ञान लिया। वर्तमान में वन विभाग द्वारा मामले की जांच की जा रही है। लेकिन इसी बीच कुछ ऐसे प्रयास सामने आए हैं जो सीधे-सीधे महामाया मंदिर ट्रस्ट की छवि को धूमिल करने की ओर इशारा कर रहे हैं।
इस विषय में शुक्रवार को महामाया मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष आशीष सिंह ठाकुर, उपाध्यक्ष सतीश शर्मा, मुख्य पुजारी एवं मैनेजिंग ट्रस्टी पंडित अरुण शर्मा, कोषाध्यक्ष रितेश जुनेजा, ट्रस्टी विनोद गोरख, शैलेन्द्र जायसवाल और मंदिर के सहयोगी ए.पी. त्रिपाठी ने बिलासपुर प्रेस क्लब में पत्रकारों से चर्चा की।

ट्रस्ट का पक्ष: ट्रस्ट के अध्यक्ष आशीष सिंह ठाकुर ने कहा कि मंदिर ट्रस्ट इस घटना में किसी भी तरह से शामिल नहीं हो सकता और ना ही किसी षड्यंत्र का हिस्सा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जो व्यक्ति सीसीटीवी फुटेज में मछलियां मारते हुए दिखाई दे रहा है, उसे वे नहीं पहचानते हैं और पूरी घटना में साजिश की बू आ रही है, जिसकी सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी।
मुख्य पुजारी पंडित अरुण शर्मा ने बताया कि वन विभाग की टीम जांच के लिए मंदिर पहुंची थी और ट्रस्ट के सभी सदस्यों ने उन्हें हर संभव सहयोग दिया। वीडियो फुटेज और डीवीआर भी विभाग को सौंप दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि मीडिया में इस तरह का माहौल बनाया जा रहा है जैसे मंदिर ट्रस्ट ही दोषी हो, जबकि सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है।
साफ-सफाई के दौरान हुई मछली की निकासी
ट्रस्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि 23 मार्च को कुंड से बदबू आने की शिकायत पर सहयोगी आनंद जायसवाल को साफ-सफाई के निर्देश दिए गए थे। इसी दौरान कुछ मछलियां निकाली गईं और उन्हें बेचकर मिली राशि ट्रस्ट में जमा कर दी गई। इस दिन तक कुंड में कछुए सामान्य स्थिति में थे। लेकिन 25 मार्च की सुबह अचानक कछुओं की मौत की सूचना सामने आई, जो ट्रस्ट के अनुसार, किसी गहरी साजिश की ओर इशारा करती है।
ट्रस्ट को बदनाम करने की कोशिश?
ट्रस्टियों का मानना है कि मंदिर प्रबंधन को आर्थिक, प्रशासनिक या धार्मिक मोर्चे पर बदनाम करने का मौका नहीं मिल रहा है, इसलिए कुछ लोग अब इस तरह की घटनाओं का सहारा लेकर प्रबंधन को निशाना बना रहे हैं। इसीलिए उन्होंने दो टूक कहा कि मामले की निष्पक्ष और गहराई से जांच होनी चाहिए, ताकि सच सामने आ सके और मंदिर ट्रस्ट की प्रतिष्ठा को जो आघात पहुंचा है, वह सुधारा जा सके।


