Sunday, August 31, 2025
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बिलासपुर में फ्लैक्स बना मौत का कारण: युवक की दर्दनाक मौत, नगर निगम की निष्क्रियता पर उठे गंभीर सवाल…

बिलासपुर के सरकंडा थाना क्षेत्र में कल तड़के हुए एक सड़क हादसे ने एक बार फिर उस सच्चाई को सामने ला दिया है, जिसे समाज अक्सर अनदेखा करता है — बिना अनुमति और बेतरतीब ढंग से लगाए गए फ्लैक्स और बैनर न केवल दृश्य प्रदूषण फैलाते हैं, बल्कि जानलेवा भी हो सकते हैं।

महामाया चौक के पास हुई इस दर्दनाक दुर्घटना में शुभम मिश्रा नामक युवक की जान चली गई। वह अपने मित्र के साथ बाइक से लौट रहा था, जब बाइक का हैंडल सड़क किनारे बिजली के खंभे में लगे एक फ्लैक्स से टकरा गया। बाइक असंतुलित हुई और दोनों युवक डिवाइडर से टकराकर गिर पड़े। शुभम की मौके पर ही मौत हो गई जबकि उसका मित्र अनुपम घायल हो गया।

यह फ्लैक्स कथित तौर पर एक विधायक के जन्मदिन के उपलक्ष्य में लगाया गया था — एक राजनीतिक रसूख की नुमाइश, जो अब एक परिवार के लिए स्थायी शोक बन गई है। क्या किसी नेता के जन्मदिन की बधाई इतने अनियंत्रित तरीके से दी जानी चाहिए कि किसी की जान ही चली जाए?

घटना के बाद कई सवाल खड़े होते हैं — क्या इस फ्लैक्स की अनुमति ली गई थी? यदि नहीं, तो इसे लगाने की इजाजत किसने दी? यदि हां, तो फिर अनुमति देने वाले विभाग की जिम्मेदारी क्या है?

यह पहली बार नहीं है जब ऐसे पोस्टर विवादों में आए हैं। कुछ महीने पहले ही बिना अनुमति के पोस्टर लगाने पर एक युवक पर जुर्माना लगाया गया था। लेकिन इस बार मामला जुर्माने से कहीं आगे का है — यह किसी की मौत का मामला है।

नगर निगम का रुख इस मामले में बेहद उलझा हुआ है। एक ओर अधिकारी कहते हैं कि यह उनके कार्यक्षेत्र में नहीं आता, वहीं दूसरी ओर हादसे के बाद नगर निगम का अतिक्रमण अमला सक्रिय हो गया और शहर भर में बैनर-फ्लैक्स हटाए जाने लगे। यह दोहरी नीति आखिर कब तक चलेगी?

शुभम मिश्रा एक मेहनती युवक था, जो अपने परिवार का सहारा था। माता-पिता पहले ही गुजर चुके थे और अब उसकी बहन पूरी तरह अकेली रह गई है। इस हादसे से न केवल एक जीवन खत्म हुआ, बल्कि एक पूरा परिवार उजड़ गया।

सवाल अब सिर्फ यह नहीं है कि शुभम की मौत का दोषी कौन है। सवाल यह है कि क्या ऐसी मौतें रोकी जा सकती हैं? क्या नगर निगम और ट्रैफिक पुलिस की जिम्मेदारी सिर्फ घटना के बाद कार्रवाई तक सीमित रह गई है?

जब तक बेतरतीब फ्लैक्स और पोस्टर पर सख्त नियम लागू नहीं होते, जब तक अनुमति के बिना लगाए गए प्रचार सामग्री पर तुरंत और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं होती — तब तक ऐसी मौतें होती रहेंगी और सिस्टम सवालों के कटघरे में खड़ा रहेगा।

अब समय है कि जनता भी जागे। क्योंकि अगली बार ये फ्लैक्स किसी और शुभम के लिए जानलेवा साबित न हो जाएं।

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