रायपुर। छत्तीसगढ़ विद्युत नियामक आयोग द्वारा हाल ही में जारी की गई नई बिजली टैरिफ दरों ने प्रदेश के किसानों को गहरा झटका दिया है। टैरिफ में की गई बढ़ोत्तरी से खेती-किसानी पर सीधा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। किसान संगठनों और नेताओं ने इस निर्णय को किसान विरोधी करार देते हुए तत्काल पुनर्विचार की मांग की है।
किसान नेता पारस नाथ साहू ने कहा कि एक ओर सरकार किसानों की आय बढ़ाने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर बिजली की दरों में बढ़ोत्तरी कर उनके खर्च को और बोझिल बना रही है। उन्होंने मांग की है कि बिजली दरों को पूर्ववत रखा जाए, ताकि खेती के लिए आवश्यक ऊर्जा सुलभ और सस्ती बनी रहे।
आय घटी, खर्च बढ़ा – किसान परेशान
पारस नाथ साहू ने कहा कि वर्तमान समय में किसानों की आय पहले से ही गिरती जा रही है। फसल की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा। ऐसे में बिजली दरों में वृद्धि किसानों की आर्थिक स्थिति को और बदतर बना देगी।
उन्होंने यह भी कहा कि यह निर्णय पूरी तरह से निंदनीय है और किसानों की अनदेखी का प्रतीक है। “छत्तीसगढ़ एक कृषि प्रधान राज्य है, जहां बड़ी संख्या में किसान आज भी सिंचाई और कृषि कार्यों के लिए बिजली पर निर्भर हैं। यदि यही स्थिति रही, तो खेती करना दिन-ब-दिन घाटे का सौदा बन जाएगा,” उन्होंने कहा।
आयोग से पुनर्विचार की अपील
किसान नेताओं ने विद्युत नियामक आयोग से अपील की है कि इस निर्णय पर पुनर्विचार कर किसानों के हित में पुराने टैरिफ को बहाल किया जाए। साथ ही राज्य सरकार से भी आग्रह किया गया है कि वह इस मुद्दे को गंभीरता से लेकर किसानों को राहत पहुंचाए।
जन आंदोलन की चेतावनी
यदि बिजली दरों में की गई वृद्धि वापस नहीं ली गई, तो किसान संगठनों ने आंदोलन की चेतावनी भी दी है। पारस नाथ साहू ने कहा कि यदि सरकार और आयोग ने किसानों की बात नहीं सुनी, तो प्रदेशभर में व्यापक आंदोलन छेड़ा जाएगा।