रायपुर, 18 जुलाई 2025 — छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केंद्र सरकार और प्रवर्तन निदेशालय (ED) पर तीखा हमला बोलते हुए एक बार फिर राजनीतिक बदले की भावना का आरोप लगाया है। उन्होंने गुरुवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के जरिए कहा कि उनके जन्मदिन और उनके बेटे के जन्मदिन पर ईडी की कार्रवाई को वे कभी नहीं भूलेंगे।
भूपेश बघेल ने लिखा:
“जन्मदिन का जैसा तोहफ़ा मोदी और शाह जी देते हैं, वैसा दुनिया के किसी लोकतंत्र में और कोई नहीं दे सकता।
मेरे जन्मदिन पर दोनों परम आदरणीय नेताओं ने मेरे सलाहकार और दो ओएसडी के घरों पर ईडी भेजी थी।
और अब मेरे बेटे चैतन्य के जन्मदिन पर मेरे घर पर ईडी की टीम छापामारी कर रही है।
इन तोहफ़ों का धन्यवाद। ताउम्र याद रहेगा।”
जानकारी के अनुसार, ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) की टीम ने रायपुर स्थित बघेल के आवास पर छापेमारी की, जिसके बाद पूरे प्रदेश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई। यह छापामारी किस मामले में हुई है, इस पर आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है, लेकिन माना जा रहा है कि यह कार्रवाई कथित कोयला, शराब और भर्ती घोटालों से जुड़ी जांचों के तहत हो सकती है।
बघेल पहले भी केंद्र पर जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाते रहे हैं। उनका कहना है कि विपक्षी नेताओं को निशाना बनाकर जांच एजेंसियों का राजनीतिक इस्तेमाल किया जा रहा है।
भूपेश बघेल के इस पोस्ट के बाद कांग्रेस समर्थकों और नेताओं ने इसे ‘लोकतंत्र की हत्या’ करार दिया है, वहीं भाजपा नेताओं का कहना है कि “कानून अपना काम कर रहा है और कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है।”
प्रदेश भाजपा प्रवक्ता ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “अगर किसी ने भ्रष्टाचार किया है तो कार्रवाई तो होगी ही। इसे राजनीतिक रंग देना सरासर गलत है।”
यह पहली बार नहीं है जब बघेल के करीबी लोगों पर ईडी या आयकर विभाग की कार्रवाई हुई हो। उनके मुख्यमंत्री रहते कई बार उनके सलाहकारों, ओएसडी और सहयोगियों के ठिकानों पर भी छापेमारी हो चुकी है। हालांकि हर बार कांग्रेस ने इसे केंद्र द्वारा “राजनीतिक प्रतिशोध” की संज्ञा दी है।
बघेल ने अपने बेटे के जन्मदिन का ज़िक्र करते हुए ईडी कार्रवाई को प्रतीकात्मक रूप में यादगार “तोहफ़ा” कहा, जो स्पष्ट रूप से केंद्र की मंशा पर सवाल उठाता है। यह बयान केवल एक व्यक्तिगत प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद बदले हुए राजनीतिक समीकरणों में विपक्ष की रणनीति का भी हिस्सा माना जा रहा है।