बिलासपुर।
बिलासपुर की सड़कों पर आज एक अभूतपूर्व नज़ारा देखने को मिला, जब जिलेभर की हजारों मितानिन महिलाएं रैली निकालकर अपने अधिकारों की मांग को लेकर प्रदर्शन करने उतरीं। नारों और बैनरों के साथ एकजुट होकर महिलाओं ने अपनी आवाज बुलंद की।
मितानिन संघ की यह रैली NHM (राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन) में शामिल करने, 50% वेतन वृद्धि और NGO प्रथा बंद करने की मांग को लेकर निकाली गई। महिलाओं का कहना है कि वे स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ हैं, लेकिन उन्हें न तो उचित मानदेय मिल रहा है और न ही स्थायित्व का आश्वासन।
तीन सूत्रीय मांगें
- NHM में शामिल करना: मितानिनों का कहना है कि उन्हें अस्थायी दर्जे में रखा गया है, जबकि वे जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने में मुख्य भूमिका निभाती हैं।
- 50% वेतन वृद्धि: मितानिनों को वर्तमान मानदेय बेहद कम बताया जा रहा है। उनका कहना है कि बढ़ती महंगाई और कार्यभार को देखते हुए वेतन वृद्धि अनिवार्य है।
- NGO प्रथा समाप्त करना: कई जिलों में मितानिनों का काम NGOs के माध्यम से संचालित किया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता और भुगतान में समस्याएं आती हैं। संघ का कहना है कि इस व्यवस्था को तुरंत बंद किया जाए।
केवल बिलासपुर जिले की बात करें तो यहां लगभग 72 हज़ार मितानिन महिलाएं इस समस्या से प्रभावित हैं। इनकी भूमिका कोरोना काल से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में टीकाकरण, प्रसव देखरेख, स्वास्थ्य जागरूकता और दवाओं की आपूर्ति में बेहद अहम रही है।
मितानिन संघ की पदाधिकारियों ने कहा, “हम स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दिन-रात काम करती हैं, लेकिन हमारी आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। जब तक हमारी तीनों मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा।”
जिला प्रशासन ने प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की थी। अधिकारियों ने मितानिन प्रतिनिधियों से बातचीत करने की बात कही है। हालांकि, आंदोलनकारी महिलाओं का कहना है कि जब तक लिखित आश्वासन नहीं मिलता, वे पीछे नहीं हटेंगी।