बिलासपुर। नगर निगम क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन के दौरान वार्ड क्रमांक 5 की पार्षद गायत्री साहू और उनके पति के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने की घटना ने पूरे साहू समाज में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है। जिला साहू संघ बिलासपुर और विभिन्न साहू संगठनों ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ बताया है।
जिला साहू संघ के महामंत्री पप्पू साहू ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि जनता की समस्याओं को लेकर धरना, आंदोलन या प्रदर्शन करना लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों का यह कर्तव्य होता है कि वे जनता की आवाज़ को शासन-प्रशासन तक पहुँचाएँ। ऐसे में महिला पार्षद के खिलाफ एफआईआर दर्ज करना न केवल अन्यायपूर्ण है बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों का स्पष्ट हनन भी है।
महामंत्री ने कहा, “विशेषकर बहुसंख्यक साहू समाज की महिला पार्षद के खिलाफ यह कार्रवाई समाज की भावनाओं का अपमान है। साहू समाज इस कदम का विरोध करता है और इसे अस्वीकार्य मानता है।” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस प्रकरण में न्यायोचित निर्णय शीघ्र नहीं लिया गया, तो जिला साहू संघ और समाज के अन्य संगठन इस मुद्दे को लेकर मुखर होंगे और सीधे शासन-प्रशासन से वार्ता करेंगे।
साहू समाज का मानना है कि महिलाओं को राजनीतिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने के प्रयासों में यह कदम एक गंभीर बाधा है। इस दृष्टि से यह मामला केवल एक पार्षद का नहीं, बल्कि पूरे समाज की अस्मिता और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा हुआ है।
इस घटना के समाधान के लिए जिला साहू संघ का प्रतिनिधि मंडल शीघ्र ही उपमुख्यमंत्री अरुण साव से मुलाकात करेगा और अपनी मांगों को मजबूती से रखेगा। प्रतिनिधि मंडल समाज की तरफ से यह संदेश देगा कि लोकतांत्रिक अधिकारों और समाज की सम्मान की रक्षा के लिए किसी भी प्रकार की कार्रवाई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इस पूरे प्रकरण ने यह सवाल भी उठाया है कि लोकतंत्र में जनता की समस्याओं को उठाने वालों पर कार्रवाई करना कितना न्यायोचित है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे कदम से न केवल जनप्रतिनिधियों की स्वतंत्रता पर असर पड़ता है, बल्कि समाज में असंतोष और आक्रोश भी बढ़ता है।
साहू समाज का संदेश स्पष्ट है: लोकतंत्र में आवाज उठाना अपराध नहीं, बल्कि कर्तव्य है।