बिलासपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) कर्मचारी संघ के आंदोलन को लेकर शासन-प्रशासन और संगठन के बीच तकरार और तेज हो गई है। संघ का कहना है कि 18 जुलाई 2025 से जारी अनिश्चितकालीन आंदोलन की 10 प्रमुख मांगों में से केवल एक मांग ही पूरी हुई है, जबकि राज्य शासन लगातार 5 मांगें पूरी होने का दावा कर रहा है। मंगलवार को प्रेस क्लब बिलासपुर में आयोजित पत्रकार वार्ता में एनएचएम कर्मचारी संघ के कार्यकारी प्रांताध्यक्ष श्याम मोहन दुबे ने सरकार पर “भ्रामक प्रचार” करने और कर्मचारियों को गुमराह करने का आरोप लगाया।
दुबे ने गिनाई अपूर्ण मांगें
दुबे ने स्पष्ट किया कि सरकार जिन मांगों को पूर्ण बताकर प्रचारित कर रही है, वास्तव में वे केवल कागजों में दर्ज हैं, ज़मीन पर लागू नहीं हुई हैं। उन्होंने क्रमवार मांगों का ब्यौरा पेश करते हुए कहा –
- नियमितीकरण, पब्लिक हेल्थ कैडर की स्थापना और ग्रेड पे निर्धारण पर कार्यकारिणी समिति की बैठक में कोई चर्चा तक नहीं हुई।
- 27% लंबित वेतन वृद्धि का विषय बार-बार बैठक में लाया गया, पर वित्त विभाग से अनुमति और राशि जारी न होने तक यह पूरी नहीं मानी जा सकती।
- अनुकम्पा नियुक्ति व नियमित भर्ती में आरक्षण का भी कोई उल्लेख बैठक में नहीं है।
- स्थानांतरण नीति पर समिति का गठन जरूर हुआ, लेकिन उसमें संगठन के प्रतिनिधियों को शामिल नहीं किया गया।
- चिकित्सा बीमा योजना का वादा 2018 से लंबित है, जिसे अब तक लागू नहीं किया गया।
आंशिक समाधान भी “अन्यायपूर्ण”
संघ ने यह माना कि
- कार्य मूल्यांकन में पारदर्शिता और
- चिकित्सा/दुर्घटना अवकाश को लेकर आंशिक आदेश जारी किए गए हैं।
लेकिन इन पर भी “दोहरी मानसिकता” का आरोप लगाया। दुबे ने कहा कि अवकाश की स्वीकृति प्रक्रिया राज्य स्तर पर रखने और बीमा योजना को आयुष्मान भारत तक सीमित करने से कर्मचारियों के साथ भेदभाव हो रहा है।
दुबे ने कहा कि कुल मिलाकर 10 में से केवल 1 मांग पूरी, 2 मांगें आंशिक रूप से अधूरी, और बाकी सभी मांगें पूरी तरह लंबित हैं। इसके बावजूद शासन द्वारा 5 मांगों के पूर्ण होने का दावा “झूठ और भ्रामक” है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक नियमितीकरण, पब्लिक हेल्थ कैडर और वेतन वृद्धि जैसे मूल मुद्दों पर ठोस कार्यवाही नहीं होगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।