Sunday, March 15, 2026
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गरीब की रसोई पर महंगाई और टैक्स का बोझ, अब आस्था पर भी ‘श्रद्धा टैक्स’ का खतरा – कांग्रेस ने सरकार पर लगाया जनता की भावनाओं से खिलवाड़ का आरोप…

बिलासपुर।
बढ़ती महंगाई और टैक्स नीति को लेकर बिलासपुर ज़िला कांग्रेस कमेटी ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस का कहना है कि सरकार “जीएसटी रिफंड” के नाम पर जश्न मना रही है, लेकिन असलियत में गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों की हालत लगातार बिगड़ रही है।

ज़िला कांग्रेस अध्यक्ष विजय केशवानी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि सरकार उत्सवों के पीछे आम जनता की वास्तविक समस्याओं को छुपाने की कोशिश कर रही है। “आज स्थिति यह है कि गरीब की रसोई पर टैक्स और महंगाई ने सीधा असर डाला है। रोज़मर्रा की ज़रूरतें पूरी करना अब आम आदमी के लिए किसी संघर्ष से कम नहीं रह गया है।”


बढ़ती महंगाई और रोज़मर्रा की कठिनाइयाँ

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि आज आम उपभोक्ता फल, सब्ज़ी, अनाज और दालों की ऊँची कीमतों से जूझ रहा है।

  • सब्ज़ियों और फलों के दाम आसमान छू रहे हैं।
  • दालें और खाद्य तेल आम घरों की पहुँच से बाहर हो रहे हैं।
  • किसान और छोटे दुकानदार मंदी और घाटे से परेशान हैं।

कांग्रेस का आरोप है कि महंगाई पर नियंत्रण के बजाय सरकार टैक्स और शुल्क बढ़ाकर आम परिवारों की मुश्किलें और बढ़ा रही है।


“श्रद्धा टैक्स” पर सियासत

सबसे गंभीर आरोप धार्मिक आयोजनों और पूजा-पाठ पर टैक्स लगाने को लेकर लगाया गया है। कांग्रेस ने इस कदम को “श्रद्धा टैक्स” का नाम दिया है। पार्टी का कहना है कि सरकार आस्था और परंपरा के साथ खिलवाड़ कर रही है।

विजय केशवानी ने कहा –
“गरीब आदमी पहले से ही महंगाई और बेरोज़गारी से जूझ रहा है। ऐसे में धार्मिक आयोजनों पर टैक्स लगाना उसकी आस्था पर चोट है। यह सिर्फ़ टैक्स नहीं बल्कि श्रद्धा के साथ किया गया अन्याय है।”

कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि पूजा-पाठ हर वर्ग के लोगों की भावनाओं से जुड़ा विषय है। जब रोज़मर्रा की ज़रूरतों का खर्च संभालना मुश्किल हो रहा हो, तब श्रद्धा पर टैक्स लगाना गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर दोहरी मार के समान है।


नोटबंदी से जीएसटी तक: जनता की पीड़ा

कांग्रेस ने यह भी याद दिलाया कि पिछले कुछ वर्षों में जनता लगातार आर्थिक दबाव झेल रही है।

  • पहले नोटबंदी ने छोटे व्यापारियों और मजदूरों को तोड़ा।
  • फिर जीएसटी लागू होने से छोटे व्यापारी और कारोबारी संकट में आए।
  • अब महंगाई और टैक्स की नीतियाँ आम परिवारों की रसोई तक पहुँच चुकी हैं।

कांग्रेस का कहना है कि किसानों और छोटे व्यापारियों को राहत देने की बजाय सरकार ने उनकी परेशानी बढ़ा दी है।


आंदोलन की चेतावनी

विजय केशवानी ने साफ़ कहा कि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों की रसोई और उनकी आस्था से छेड़छाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने अपनी नीतियों पर पुनर्विचार नहीं किया, तो पार्टी सड़क पर उतरकर व्यापक आंदोलन करेगी।


जनता के सवाल

कांग्रेस ने जनता की ओर से कई सवाल उठाए हैं—

  • जब महंगाई चरम पर है, तो सरकार आम लोगों को राहत क्यों नहीं दे रही?
  • क्या धार्मिक आयोजनों पर टैक्स लगाना सही है, जबकि यह आस्था और परंपरा का विषय है?
  • किसान और छोटे व्यापारी पहले से घाटे में हैं, फिर उन पर अतिरिक्त बोझ क्यों?

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