क्राइमछत्तीसगढ़

तमनार कोल ब्लॉक विवाद: जनसुनवाई से लेकर हिंसक टकराव तक, प्रशासन और ग्रामीण आमने-सामने…

रायगढ़ (छत्तीसगढ़)।
रायगढ़ जिले के तमनार क्षेत्र में गारे–पेलमा सेक्टर-1 कोल ब्लॉक के आवंटन को लेकर चल रहा विवाद गुरुवार को हिंसक टकराव में बदल गया। आंदोलनकारी ग्रामीणों और पुलिस के बीच हुई झड़प में कई पुलिसकर्मी घायल हो गए, वहीं सरकारी और निजी वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है।

गारे–पेलमा कोल ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले 14 गांवों के ग्रामीण लंबे समय से कोयला खनन का विरोध कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि खनन से उनकी पुश्तैनी कृषि भूमि, जंगल, जलस्रोत और पर्यावरण नष्ट हो जाएंगे। ग्राम सभाओं में भी खनन के खिलाफ प्रस्ताव पारित किए जा चुके हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन उनकी सहमति के बिना जबरन जमीन अधिग्रहण कर खनन शुरू करवाना चाहता है।

इस पूरे आंदोलन की जड़ 8 दिसंबर को हुई कथित जनसुनवाई बताई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले जनसुनवाई उनके विरोध के कारण स्थगित हुई थी, लेकिन बाद में जिला प्रशासन और कंपनी प्रबंधन ने कुछ लोगों को शामिल कर गुपचुप तरीके से औपचारिकता पूरी कर ली।
इसी के विरोध में 14 गांवों के ग्रामीण 12 दिसंबर से तमनार में धरने पर बैठे थे। कई ग्रामीणों ने अपने घरों में ताला लगाकर स्कूल परिसर को अस्थायी आंदोलन स्थल बना लिया।

पुलिस द्वारा जारी बयान के अनुसार, 12 दिसंबर से चल रहे धरने के दौरान 15 दिसंबर की सुबह लगभग 300 लोग मौजूद थे, जो सड़क पर बैठकर आवागमन बाधित कर रहे थे। प्रशासनिक अधिकारियों ने कई बार लाउडस्पीकर के जरिए शांतिपूर्ण धरने की अपील की।
दोपहर करीब ढाई बजे भीड़ अचानक उग्र हो गई और बैरिकेड तोड़कर पुलिस पर पत्थर व लाठी-डंडों से हमला कर दिया। इस हमले में एसडीओपी अनिल विश्वकर्मा, थाना प्रभारी कमला पसाम सहित कई पुलिसकर्मी घायल हुए। भीड़ ने पुलिस बस, जीप, एंबुलेंस और अन्य सरकारी वाहनों को आग लगा दी। इसके बाद भीड़ जिंदल के कोल हैंडलिंग प्लांट की ओर बढ़ी, जहां संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया।

कांग्रेस का सरकार पर हमला

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने इस घटना को सरकार की “हठधर्मी नीति” का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि आदिवासी मुख्यमंत्री के शासन में ही आदिवासियों पर लाठियां चलाई जा रही हैं।
दीपक बैज ने आरोप लगाया कि सरकार उद्योगपतियों के इशारे पर जल, जंगल और जमीन को छीनकर कॉरपोरेट को सौंप रही है। तमनार क्षेत्र संविधान की पांचवीं अनुसूची में आता है, जहां पेसा कानून लागू है और किसी भी परियोजना के लिए स्थानीय लोगों की सहमति अनिवार्य है।
उन्होंने ग्रामीणों पर दर्ज मामलों को वापस लेने और पुलिस दमन बंद करने की मांग की, साथ ही चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो कांग्रेस आंदोलन करेगी।

बढ़ता तनाव, समाधान की जरूरत

घटना के बाद तमनार और आसपास के इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रशासन कानून व्यवस्था बनाए रखने की बात कर रहा है, वहीं ग्रामीण अपनी जमीन और अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने की बात कह रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते संवाद और पारदर्शी प्रक्रिया नहीं अपनाई गई, तो यह विवाद और गहरा सकता है।

तमनार की यह घटना एक बार फिर विकास, पर्यावरण और आदिवासी अधिकारों के बीच संतुलन के सवाल को सामने लाकर खड़ा कर रही है।

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