Thursday, February 26, 2026
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बिलासपुर के एंटी करप्शन ब्यूरो की बड़ी कार्रवाई: स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की बिल्हा शाखा में 2 करोड़ से अधिक का गबन, कैशियर गिरफ्तार…

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में बैंकिंग तंत्र की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करने वाला एक बड़ा मामला सामने आया है। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) बिलासपुर ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की बिल्हा शाखा में करोड़ों रुपये के गबन के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए तत्कालीन कैशियर तेजवथ थीरापतम्मा को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पर करीब 2 करोड़ 6 लाख 37 हजार 600 रुपये (₹2,06,37,600) के गबन का गंभीर आरोप है।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह पूरा घटनाक्रम 19 दिसंबर 2024 से 2 जनवरी 2025 के बीच का बताया जा रहा है। आरोप है कि कैशियर ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए बैंक के कुछ कर्मचारियों और अन्य व्यक्तियों के साथ मिलकर खातों और रिकॉर्ड में छेड़छाड़ की। इस दौरान बड़ी राशि को व्यवस्थित तरीके से गबन कर लिया गया, जिससे बैंक को भारी आर्थिक नुकसान हुआ।

बताया जा रहा है कि गबन की गई रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किया गया और बाद में उसे बैंक के नियमित खर्च — जैसे भोजन, पेय पदार्थ, किराया और रखरखाव — के मद में दर्शाकर छुपाने की कोशिश की गई। इस तरह वित्तीय अनियमितता को वैध लेनदेन का रूप देने का प्रयास किया गया।

मामले का खुलासा तब हुआ जब बिल्हा शाखा के प्रबंधक पीयूष बारा ने आर्थिक अपराध अन्वेषण/एसीबी मुख्यालय रायपुर में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर 19 जनवरी 2026 को एसीबी ने आरोपी और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध कर जांच प्रारंभ की।

जांच के दौरान बैंक की विभागीय रिपोर्ट और एसीबी द्वारा एकत्र किए गए दस्तावेजी साक्ष्यों में गबन की पुष्टि होने के बाद टीम ने आरोपी की तलाश तेज कर दी।

26 फरवरी 2026 को एसीबी को सूचना मिली कि आरोपी कैशियर बिल्हा स्थित बैंक परिसर में मौजूद है। सूचना मिलते ही टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे हिरासत में लिया और पूछताछ के बाद विधिवत गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तारी के दौरान आरोपी के पास से एक संदिग्ध मोबाइल फोन भी जब्त किया गया है। अधिकारियों का मानना है कि इस मोबाइल से लेनदेन, संपर्कों और संभावित सहआरोपियों से जुड़े महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मिल सकते हैं।

जानकारी के मुताबिक, आरोपी कैशियर जून 2025 से निलंबित थी और उसे रिजनल बिजनेस ऑफिस (RBO) जगदलपुर से अटैच किया गया था। हालांकि, वह लंबे समय से ड्यूटी से अनुपस्थित चल रही थी। आरोपी मूलतः आंध्र प्रदेश के खम्मम जिले की निवासी बताई जा रही है।

एसीबी ने आरोपी को विशेष न्यायालय बिलासपुर में पेश कर रिमांड लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जांच एजेंसी इस मामले में अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की भी गहराई से जांच कर रही है। यह भी पड़ताल की जा रही है कि क्या इस गबन में कोई संगठित नेटवर्क या आंतरिक मिलीभगत शामिल थी।

इस कार्रवाई के बाद बैंकिंग प्रणाली में आंतरिक नियंत्रण और निगरानी तंत्र को लेकर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं। फिलहाल एसीबी की आगे की जांच पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

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