बिलासपुर/रायपुर। छत्तीसगढ़ में बिना मान्यता के निजी स्कूलों के संचालन और एडमिशन के लिए विज्ञापन प्रकाशित किए जाने के मामले को लेकर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को नोटिस जारी कर व्यक्तिगत शपथ पत्र के साथ जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। साथ ही संबंधित स्कूल प्रबंधन को भी पक्षकार बनाते हुए नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। मामले की अगली सुनवाई 24 मार्च को तय की गई है।
यह मामला जनहित याचिका के माध्यम से हाई कोर्ट पहुंचा है, जिस पर चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान विकास तिवारी द्वारा दायर हस्तक्षेप याचिका में बिना मान्यता के संचालित हो रहे स्कूलों में एडमिशन के लिए विज्ञापन प्रकाशित किए जाने का मुद्दा उठाया गया।
हस्तक्षेप याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि इस संबंध में 5 फरवरी 2026 को लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने दुर्ग, रायपुर और बिलासपुर के जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) को शिकायतें भेजकर एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। बावजूद इसके अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इस पर डिवीजन बेंच ने नाराजगी जताते हुए संबंधित अधिकारियों को पूर्व आदेश का पालन करते हुए अगली सुनवाई तक कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने कोर्ट के सामने सत्र 2026-27 के लिए प्रकाशित एडमिशन विज्ञापन की प्रतियां भी पेश कीं। इन विज्ञापनों में कई निजी स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी दी गई थी। याचिकाकर्ता का आरोप है कि इनमें से कई स्कूल आवश्यक मान्यता के बिना ही संचालित हो रहे हैं और खुलेआम एडमिशन के लिए विज्ञापन जारी कर रहे हैं।
याचिकाकर्ता ने दलील दी कि बिना मान्यता के संचालित स्कूलों द्वारा एडमिशन के विज्ञापन प्रकाशित किए जाने से अभिभावक भ्रमित हो रहे हैं और बच्चों का भविष्य भी खतरे में पड़ सकता है। कोर्ट ने इस मामले को गंभीर मानते हुए इसे अपने पूर्व आदेश का प्रत्यक्ष उल्लंघन बताया।
याचिका में जिन स्कूलों का उल्लेख किया गया है, उनमें रायपुर के मोवा स्थित तुलसी कृष्णा किड्स एकेडमी के साथ ही कृष्णा किड्स एकेडमी की शंकर नगर, न्यू राजेंद्र नगर, सुंदर नगर और शैलेंद्र नगर स्थित चार शाखाएं शामिल हैं। इसके अलावा कृष्णा पब्लिक स्कूल, तुलसी (रायपुर) को भी मामले में पक्षकार बनाया गया है।
मामले की सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने संबंधित स्कूल प्रबंधन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और स्कूल शिक्षा विभाग को पूरे मामले की विस्तृत जानकारी शपथ पत्र के साथ अदालत में पेश करने का निर्देश दिया है। अब इस मामले में 24 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई में शिक्षा विभाग की कार्रवाई और स्कूलों की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।


