बिलासपुर।
राजस्व विभाग एक बार फिर अपने ही फैसलों के कारण सवालों के घेरे में आ गया है। हाल ही में जारी तबादला सूची ने प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। जमीन हेराफेरी के आरोप में निलंबित रहे आरआई सुरेश कुमार ठाकुर की बहाली के महज दो महीने के भीतर ही उन्हें सकरी जैसे महत्वपूर्ण और ‘वर्कलोड’ वाले क्षेत्र में पदस्थ कर दिया गया है, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर संदेह उत्पन्न हो रहा है।
यह मामला इसलिए और संवेदनशील हो गया है क्योंकि अगस्त 2024 में मुख्यमंत्री जनदर्शन के दौरान किसान अरविंद शर्मा की शिकायत पर सुरेश ठाकुर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई थी। आरोप था कि पटवारी रहते हुए उन्होंने 3.92 हेक्टेयर जमीन अपने छोटे भाई के नाम दर्ज कर दी। उस समय तत्कालीन कलेक्टर अवनीश शरण ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उन्हें निलंबित कर दिया था।
लेकिन अब, बहाली के तुरंत बाद ही उनकी सकरी की डायवर्सन शाखा में तैनाती ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या विभागीय कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई है? क्या प्रभाव और पहुंच के आधार पर पोस्टिंग तय हो रही है?
तबादला सूची में कई अन्य बदलाव भी चर्चा में हैं। आदेश के मुताबिक संजय कौशिक को नजूल शाखा बिलासपुर भेजा गया है, जबकि सुरेश ठाकुर को डोंगरी से हटाकर सकरी में पदस्थ किया गया। इसके अलावा गौरव गुप्ता को विजयपुर और राहुल शर्मा को भू-अभिलेख शाखा में स्थानांतरित किया गया है।
इन फेरबदल के बाद विभाग के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ रहा है। कर्मचारियों के बीच यह चर्चा तेज है कि नियमों को दरकिनार कर ‘चहेते’ अधिकारियों को महत्वपूर्ण और लाभकारी पदों पर बैठाया जा रहा है।
जानकारों का कहना है कि सकरी की डायवर्सन शाखा में सामान्यतः एक आरआई पर्याप्त होता है, लेकिन यहां तीन-तीन अधिकारियों की तैनाती कर दी गई है। इससे कार्य संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया है। दूसरी ओर कई ग्रामीण सर्किल खाली पड़े हैं, जहां सीमांकन, बंटवारा और नामांतरण जैसे जरूरी कार्य लंबित हैं। इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है, जिन्हें छोटे-छोटे कामों के लिए भटकना पड़ रहा है।
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि तबादले के बाद डोंगरी सर्किल पूरी तरह खाली हो गया है। वहीं रतनपुर तहसील के कई सर्किल पहले से ही अधिकारियों की कमी से जूझ रहे हैं। नजूल शाखा में भी वर्षों से एक ही स्थान पर अधिकारियों के जमे रहने की चर्चा लगातार बनी हुई है।
पूरे मामले ने अधीक्षक केशव यादव की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विभाग के भीतर यह धारणा बन रही है कि फील्ड की वास्तविक जरूरतों को नजरअंदाज कर कार्यालय में आरआई की ‘फौज’ खड़ी की जा रही है और मनचाही पोस्टिंग दी जा रही है।
इस पूरे विवाद पर कलेक्टर संजय अग्रवाल का कहना है कि वर्तमान में जनगणना कार्य के चलते तबादलों पर रोक लगी हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनगणना कार्य पूरा होने के बाद नई तबादला सूची जारी कर व्यवस्था को संतुलित किया जाएगा।
फिलहाल, यह मामला प्रशासनिक व्यवस्था की पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता पर एक बड़ा सवाल बनकर खड़ा है। अब देखना यह होगा कि आगामी समय में विभाग इन सवालों का जवाब किस तरह देता है और क्या वास्तव में व्यवस्था में सुधार होता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।



