बिलासपुर/रायपुर। छत्तीसगढ़ के राजस्व विभाग में वर्षों से दबा असंतोष अब खुलकर सामने आ गया है। प्रदेशभर के पटवारियों ने सरकार को साफ संदेश दे दिया है कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि निर्णय चाहिए। मुख्य सचिव के नाम सौंपे गए ज्ञापन में राजस्व पटवारी संघ ने 15 दिनों का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी है कि यदि पदोन्नति प्रक्रिया शुरू नहीं हुई और वेतन विसंगति का समाधान नहीं किया गया, तो पूरे प्रदेश में आंदोलन छेड़ा जाएगा।
यह चेतावनी केवल कर्मचारियों की नाराजगी नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर सवाल है, जिसकी सबसे मजबूत कड़ी माने जाने वाले पटवारी खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।
पटवारी संघ का कहना है कि राजस्व प्रशासन का लगभग हर महत्वपूर्ण काम—नामांतरण, सीमांकन, भू-अभिलेख, फसल गिरदावरी, नक्शा सुधार, राजस्व प्रकरण और सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन—पटवारियों के कंधों पर चलता है। लेकिन विडंबना यह है कि वही कर्मचारी वर्षों तक एक ही पद पर सेवा देते-देते सेवानिवृत्त हो जाते हैं।
संघ का आरोप है कि लंबे समय से पदोन्नति प्रक्रिया ठप पड़ी है। राजस्व निरीक्षक (RI) के पद खाली हैं, लेकिन उन्हें पदोन्नति से भरने के बजाय सीधी भर्ती का रास्ता अपनाया जा रहा है। इससे वर्षों से सेवा दे रहे कर्मचारियों का मनोबल टूट रहा है।
वेतन बढ़ा नहीं, उल्टा घट गया!
पटवारी संघ ने ज्ञापन में वेतन विसंगति का ऐसा मामला उठाया है, जिसने पूरी वेतन व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। संघ के अनुसार, वर्ष 2010 बैच के कई पटवारियों को उच्च वेतनमान मिलने के बावजूद उनका मूल वेतन पहले से कम हो गया। यानी पद और ग्रेड तो बढ़ा, लेकिन वेतन घट गया।
संघ का कहना है कि यह केवल वर्तमान वेतन का मामला नहीं है। इसका असर भविष्य की वेतन वृद्धि, पदोन्नति, पेंशन और अन्य सेवा लाभों पर भी पड़ेगा। यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ, तो कर्मचारियों को जीवनभर आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा।
संघ की प्रमुख मांगें
- पटवारियों की पदोन्नति के लिए निश्चित समय-सीमा तय की जाए।
- वर्षों से लंबित पदोन्नति प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाए।
- राजस्व निरीक्षक (RI) के सभी रिक्त पद केवल पटवारियों की पदोन्नति से भरे जाएं।
- RI पदों पर सीधी भर्ती पूरी तरह बंद की जाए।
- पदोन्नति में 50 प्रतिशत वरिष्ठता और 50 प्रतिशत विभागीय परीक्षा का प्रावधान लागू किया जाए।
- वेतन विसंगति की जांच कर न्यायसंगत समाधान किया जाए।
आसान नहीं होगा फैसला
सरकार के सामने अब दोहरी चुनौती है। एक ओर कर्मचारियों की वर्षों पुरानी मांगें हैं, तो दूसरी ओर प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने की जिम्मेदारी। यदि मांगों पर समय रहते निर्णय नहीं हुआ और आंदोलन शुरू हो गया, तो सबसे ज्यादा असर आम नागरिकों पर पड़ेगा।
राजस्व विभाग से जुड़े नामांतरण, सीमांकन, भू-अभिलेख, ऋण पुस्तिका, फसल गिरदावरी, मुआवजा प्रकरण और अन्य जरूरी सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन भी धीमा पड़ सकता है।
आर-पार की लड़ाई?
पटवारी संघ ने सरकार को स्पष्ट संदेश दिया है कि अब प्रतीक्षा की सीमा समाप्त हो चुकी है। 15 दिनों के भीतर यदि पदोन्नति और वेतन विसंगति पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो प्रदेशभर के पटवारी आंदोलन की राह पर होंगे।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या सरकार कर्मचारियों की नाराजगी को समय रहते दूर करेगी, या फिर राजस्व विभाग की रीढ़ माने जाने वाले पटवारियों का असंतोष प्रदेशव्यापी आंदोलन का रूप लेगा? आने वाले 15 दिन न केवल सरकार, बल्कि पूरे राजस्व प्रशासन के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं।


