बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को रोजगारपरक और कौशल आधारित शिक्षा देने वाले व्यावसायिक प्रशिक्षक अब अपनी ही सेवा व्यवस्था को लेकर संघर्ष करने मजबूर हैं। वर्ष 2014 से प्रदेश के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में व्यावसायिक शिक्षा को संचालित कर रहे प्रशिक्षकों ने अपनी लंबित समस्याओं और विभिन्न मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया है। छत्तीसगढ़ नवीन व्यावसायिक प्रशिक्षक कल्याण संघ ने 17 अगस्त 2026 को कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर मानदेय, सेवा सुरक्षा, लंबित भुगतान, अवकाश, नियमितीकरण सहित कुल 16 प्रमुख मांगों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
संघ का कहना है कि प्रदेश के करीब 1,285 शासकीय विद्यालयों में लगभग 15 ट्रेडों के माध्यम से विद्यार्थियों को कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ब्यूटी एंड वेलनेस, अपैरल, पावर, टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी, कंस्ट्रक्शन, रिटेल, ऑटोमोबाइल, एग्रीकल्चर, टेलीकॉम, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड हार्डवेयर, आईटी, प्लंबिंग, मीडिया एंड एंटरटेनमेंट, बैंकिंग एंड फाइनेंस तथा हेल्थ केयर जैसे ट्रेडों में प्रशिक्षक लंबे समय से सेवाएं दे रहे हैं।
वर्षों से विद्यार्थियों को रोजगार के लिए तैयार करने वाले इन प्रशिक्षकों का आरोप है कि उनकी अपनी सेवा व्यवस्था अब भी अस्थिर है। संघ ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास को स्कूली शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर दिया गया है, लेकिन इस व्यवस्था को जमीन पर लागू करने वाले प्रशिक्षकों की समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा है।
दस साल की सेवा के बाद भी मानदेय में मामूली बढ़ोतरी को लेकर प्रशिक्षकों में नाराजगी है। संघ के अनुसार पिछले 10 वर्षों में अलग-अलग चरणों में करीब 1,000-1,000 रुपये की वृद्धि के जरिए कुल 3,000 रुपये का ही इजाफा हुआ है। संघ ने इसे वर्तमान महंगाई और प्रशिक्षकों की जिम्मेदारियों के मुकाबले बेहद अपर्याप्त बताया है।
प्रशिक्षकों ने हरियाणा और दिल्ली की तर्ज पर 38,100 रुपये प्रतिमाह सम्मानजनक मानदेय देने और प्रत्येक वर्ष नियमित वेतनवृद्धि अथवा इंक्रीमेंट का प्रावधान लागू करने की मांग की है।
सेवा सुरक्षा को लेकर भी संघ ने गंभीर सवाल उठाए हैं। तृतीय पक्ष अथवा कंपनी आधारित व्यवस्था को समाप्त कर प्रशिक्षकों को विभागीय व्यवस्था में समायोजित करने और सेवा सुरक्षा देने की मांग की गई है। संघ का कहना है कि कंपनी बदलने या नई निविदा आने के साथ लंबे समय से काम कर रहे प्रशिक्षकों की नौकरी पर संकट खड़ा हो जाता है।
संघ ने नई निविदा में शामिल कंपनियों को स्पष्ट निर्देश देने की मांग की है कि पहले से कार्यरत सभी 1,029 व्यावसायिक प्रशिक्षकों को यथावत सेवा में रखा जाए।
इसी तरह 1,029 प्रशिक्षकों के मई और जून महीने के मानदेय का भुगतान भी लंबित बताया गया है। संघ ने दोनों महीनों की राशि तत्काल जारी करने और हर माह निर्धारित समय पर मानदेय भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की है। इसके अलावा PAB 2025-26 के तहत स्वीकृत 1,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय वृद्धि की लंबित राशि को अनुपूरक बजट से स्वीकृत कर संबंधित प्रशिक्षकों को 12,000 रुपये एरियर्स के रूप में भुगतान करने की मांग भी की गई है।
हेल्थ केयर ट्रेड के 121 अनुभवी प्रशिक्षकों के मानदेय में कटौती को लेकर भी संघ ने आपत्ति जताई है। ज्ञापन के अनुसार इन प्रशिक्षकों का मानदेय 23,000 रुपये से घटाकर 20,000 रुपये प्रतिमाह किया गया है। संघ ने मानदेय को पुनः 23,000 रुपये प्रतिमाह करने की मांग की है।
लक्ष्य कंपनी द्वारा सेवा से बाहर किए गए चार व्यावसायिक प्रशिक्षकों की पुनर्नियुक्ति की मांग भी ज्ञापन में शामिल है। संघ ने कहा है कि लंबे समय से सेवाएं देने वाले इन प्रशिक्षकों को प्राथमिकता के आधार पर वापस सेवा में लिया जाए और उनकी नौकरी सुनिश्चित की जाए।
इंडस्ट्रियल विजिट और गेस्ट लेक्चर की राशि में कटौती तथा भुगतान लंबित होने का मुद्दा भी उठाया गया है। संघ ने 25 प्रतिशत कटौती की गई राशि का पूर्ण भुगतान कराने के साथ Indus और Gram Tarang कंपनियों से संबंधित प्रशिक्षकों की लंबित GL एवं IV राशि तत्काल जारी करने की मांग की है।
संघ के अनुसार प्रदेश के 478 विद्यालयों में पिछले तीन वर्षों से व्यावसायिक शिक्षा संचालित हो रही है, लेकिन वहां प्रशिक्षकों की नियुक्ति अथवा पदस्थापना का मामला अब तक लंबित है। इन स्कूलों में तत्काल प्रशिक्षकों की नियुक्ति की मांग की गई है, ताकि विद्यार्थियों को नियमित और गुणवत्तापूर्ण कौशल प्रशिक्षण मिल सके।
व्यावसायिक प्रशिक्षकों ने अवकाश को लेकर भी स्पष्ट नीति बनाने की मांग की है। संघ ने प्रतिवर्ष 20 दिन आकस्मिक अवकाश, समुचित चिकित्सा अवकाश और महिला प्रशिक्षकों के लिए मातृत्व अवकाश की सुविधा देने की मांग की है। साथ ही प्रशिक्षकों को उनके निर्धारित व्यावसायिक कार्यों के अलावा गैर-व्यावसायिक कार्यों में नहीं लगाए जाने की मांग भी की गई है।
संघ ने हिमाचल प्रदेश सहित अन्य राज्यों की तर्ज पर छत्तीसगढ़ के व्यावसायिक प्रशिक्षकों को ग्रीष्मकालीन अवकाश देने की मांग भी रखी है। इसके साथ ही प्रशिक्षकों की समस्याओं और लंबित मामलों की नियमित समीक्षा के लिए विभागीय स्तर पर प्रभावी समिति अथवा स्थायी व्यवस्था गठित करने की मांग की गई है।
संघ का कहना है कि व्यावसायिक शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए सबसे पहले उन प्रशिक्षकों की समस्याओं का समाधान जरूरी है, जो वर्षों से विद्यार्थियों को रोजगार के लिए तैयार कर रहे हैं। प्रशिक्षकों ने कलेक्टर से सभी 16 मांगों पर सकारात्मक और तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
दस साल से सरकारी स्कूलों में कौशल शिक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहे प्रशिक्षकों का सवाल अब सीधा है—जब विद्यार्थियों के भविष्य को हुनर देने की जिम्मेदारी उनकी है, तो उनके अपने भविष्य की गारंटी कब होगी?


