Homeबिलासपुरविधायक के खिलाफ कांग्रेस का बड़ा संग्राम, कलेक्ट्रेट घेराव में टूटी बैरिकेडिंग...

विधायक के खिलाफ कांग्रेस का बड़ा संग्राम, कलेक्ट्रेट घेराव में टूटी बैरिकेडिंग तो वाटर कैनन से पुलिस ने रोकी भीड़; विजय केशरवानी ने लगाए गंभीर आरोप…

बिलासपुर। न्यायधानी बिलासपुर में बेलतरा विधायक के खिलाफ कांग्रेस ने मोर्चा खोलते हुए सड़क पर शक्ति प्रदर्शन किया। पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष विजय केशरवानी के नेतृत्व में सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट का घेराव करने निकले तो शहर का राजनीतिक माहौल गरमा गया। कांग्रेस भवन से निकली रैली नेहरू चौक पहुंची, जहां पुलिस ने तीन स्तर की बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की। लेकिन विरोध प्रदर्शन के दौरान हालात ऐसे बने कि कार्यकर्ता बैरिकेडिंग पर चढ़ गए और उसे क्षतिग्रस्त कर दिया। पुलिस और कांग्रेसियों के बीच जमकर धक्का-मुक्की हुई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को वाटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा।

करीब एक घंटे तक चले इस घटनाक्रम ने बिलासपुर की राजनीति में नए टकराव के संकेत दे दिए हैं। कांग्रेस ने विधायक की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कथित राजनीतिक हस्तक्षेप, विकास कार्यों में भेदभाव, अवैध रेत उत्खनन और अवैध प्लॉटिंग जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। प्रदर्शन के बाद हुई सभा में विजय केशरवानी ने तीखे तेवर दिखाते हुए आरोप लगाया कि सत्ता के प्रभाव का इस्तेमाल निजी हितों और चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए किया जा रहा है।

कांग्रेस भवन से निकली रैली जब कलेक्ट्रेट की ओर बढ़ी तो नेहरू चौक पर पुलिस ने सुरक्षा का मजबूत घेरा बना रखा था। तीन लेयर की बैरिकेडिंग के जरिए प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने की रणनीति अपनाई गई थी। इसके बावजूद कार्यकर्ताओं ने बैरिकेडिंग पार करने की कोशिश की। देखते ही देखते पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। बैरिकेडिंग क्षतिग्रस्त होने के बाद पुलिस ने वाटर कैनन चलाकर भीड़ को तितर-बितर करने का प्रयास किया।

इस घटनाक्रम ने कांग्रेस के आंदोलन को राजनीतिक रूप से और आक्रामक बना दिया। पार्टी ने संकेत दिया है कि वह इस मुद्दे को केवल एक दिन के प्रदर्शन तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि जनता के बीच जाकर कथित अनियमितताओं और भेदभाव के आरोपों को उठाएगी।

सभा को संबोधित करते हुए विजय केशरवानी ने विधायक पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि ग्राम पंचायतों से लेकर नगर निगम तक राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि अपने करीबी लोगों को ठेके दिलाने और उन्हें लाभ पहुंचाने के लिए प्रभाव का इस्तेमाल किया जा रहा है। विकास कार्यों में भी कथित तौर पर पक्षपात किए जाने का आरोप लगाया गया।

कांग्रेस ने सवाल उठाया कि यदि सरकारी कामकाज में राजनीतिक पसंद-नापसंद हावी होगी तो निष्पक्ष विकास और आम जनता के हितों की रक्षा कैसे होगी? पार्टी नेताओं ने मांग की कि विकास कार्यों, ठेकों और संबंधित शिकायतों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि आरोपों की सच्चाई सामने आ सके।

प्रदर्शन में अवैध रेत उत्खनन और अवैध प्लॉटिंग का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया गया। कांग्रेस नेताओं ने कोटा विधायक द्वारा पहले उठाए गए बयानों का हवाला देते हुए भ्रष्टाचार और कथित अनियमितताओं पर सवाल खड़े किए। निजी संस्थानों को अनुचित लाभ पहुंचाए जाने के आरोप भी लगाए गए। इन आरोपों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है, हालांकि इनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। संबंधित दस्तावेजों, विभागीय जांच और विधायक का पक्ष सामने आने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

कांग्रेस ने जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। पार्टी नेताओं का आरोप है कि कलेक्टर ने ज्ञापन लेने से इनकार कर दिया और पुलिस के माध्यम से प्रदर्शनकारियों की आवाज दबाने की कोशिश की गई। कांग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने के अधिकार से जोड़ते हुए प्रशासन पर निशाना साधा।

हालांकि, ज्ञापन को लेकर लगाए गए आरोपों पर प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। ऐसे में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि ज्ञापन सौंपने के दौरान वास्तव में क्या हुआ और प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों की मांगों पर क्या रुख अपनाया। कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है, वहीं जनता की शिकायतों को सुनना और नियमानुसार उनका निराकरण करना प्रशासन का दायित्व है।

प्रदर्शन के बाद कांग्रेस ने आने वाले दिनों में गांवों और शहरी वार्डों में विशेष जनसंपर्क अभियान चलाने की घोषणा की। पार्टी का कहना है कि कथित राजनीतिक हस्तक्षेप, विकास कार्यों में भेदभाव और अनियमितताओं के मुद्दों को जनता के बीच ले जाया जाएगा। कांग्रेस नेताओं ने बड़े आंदोलन की चेतावनी देते हुए साफ संकेत दिया कि वे इस मामले में पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।

अब बिलासपुर की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि कांग्रेस अपने आरोपों के समर्थन में कौन-से तथ्य और दस्तावेज सामने लाती है और विधायक सुशांत शुक्ला तथा जिला प्रशासन इन आरोपों पर क्या जवाब देते हैं। यदि शिकायतों में तथ्य हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच जरूरी है, वहीं बिना प्रमाण किसी भी आरोप को अंतिम सत्य मानना भी उचित नहीं होगा।

नेहरू चौक पर बैरिकेडिंग, धक्का-मुक्की और वाटर कैनन के इस्तेमाल के साथ शुरू हुआ यह राजनीतिक टकराव अब गांवों और वार्डों तक पहुंचाने की तैयारी है। कांग्रेस ने आंदोलन को विस्तार देने का ऐलान कर दिया है। ऐसे में आने वाले दिनों में बिलासपुर की सियासत में आरोप-प्रत्यारोप और राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का दौर और तेज होने के आसार हैं।

देखिए वीडियो

https://www.instagram.com/reel/DebcFXXNhxy/?vrfl=ZjFvN3d5MHhueWIx

spot_img

advertisement

spot_img
RELATED ARTICLES

Recent posts