Saturday, August 30, 2025
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बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में पैरोल पर गए कैदियों की वापसी का महत्वपूर्ण मामला: 70 अभी भी फरार, डीजीपी से रिपोर्ट तलब…

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में पैरोल पर गए कैदियों की वापसी से संबंधित एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई हाल ही में हुई। यह मामला राज्य की जेलों से पैरोल पर रिहा किए गए कैदियों की वापसी न होने का है, जो काफी गंभीर मुद्दा बन गया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की डबल बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। शासकीय अधिवक्ता द्वारा हाईकोर्ट को 30 सितंबर 2024 के आदेश की जानकारी दी गई, जिसमें पैरोल पर गए कैदियों की स्थिति के बारे में बताया गया था।

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि डीजीपी (जेल) ने शपथ पत्र के माध्यम से 83 कैदियों के पैरोल पर बाहर होने की जानकारी दी, जिनमें से केवल 10 कैदियों को अब तक पकड़ा जा सका है। इसके अलावा, तीन कैदियों की मौत हो चुकी है। चिंताजनक बात यह है कि अभी भी 70 कैदी ऐसे हैं जो पैरोल पर जाने के बाद लौटे नहीं हैं। इस तथ्य ने कानून व्यवस्था और न्यायिक प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

हाईकोर्ट ने पैरोल पर गए कैदियों की वापसी न होने पर गहरी नाराजगी जताई है। इस समस्या के समाधान के लिए डीजीपी (जेल) द्वारा 23 अक्टूबर 2024 को प्रदेश के सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को निर्देशित किया गया है कि वे विशेष अभियान चलाकर इन कैदियों को पकड़ने का प्रयास करें और दैनिक आधार पर रिपोर्ट सौंपें। इस आदेश के अनुसार, सभी पुलिस अधीक्षकों से डेली बेसिस पर स्थिति की जानकारी मांगी जा रही है ताकि जल्द से जल्द लापता कैदियों को वापस जेल में लाया जा सके।

हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए डीजीपी (जेल) से एक बार फिर ताजा रिपोर्ट तलब की है। इस रिपोर्ट को शपथ पत्र के साथ अदालत में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि यह देखा जा सके कि अब तक कितनी प्रगति हुई है और कितने कैदियों को वापस लाने में सफलता मिली है।

इस मामले की अगली सुनवाई 12 दिसंबर 2024 को होगी, जहां अदालत डीजीपी (जेल) से रिपोर्ट की समीक्षा करेगी और कैदियों की वापसी के संबंध में उठाए गए कदमों का मूल्यांकन करेगी। पैरोल का मकसद कैदियों को एक मौका देना होता है, लेकिन यदि इसका दुरुपयोग होता है तो यह पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर असर डाल सकता है। इसलिए हाईकोर्ट इस मामले को बहुत गंभीरता से ले रहा है।

यह मामला छत्तीसगढ़ की न्यायिक और प्रशासनिक प्रणाली के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा है। उम्मीद है कि अगली सुनवाई तक पुलिस प्रशासन कैदियों की वापसी के लिए ठोस कदम उठाएगा और इस मुद्दे का समाधान निकालेगा।

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