बिलासपुर। 24 नवंबर, 2024 को अम्बिकापुर के सर्किट हाउस में छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी के तत्वावधान में सरगुजा संभाग के न्यायिक अधिकारियों के लिए एक महत्वपूर्ण डिवीजनल सेमिनार का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में सरगुजा, जशपुर, सूरजपुर, कोरिया (बैकुण्ठपुर), और बलरामपुर-रामानुजगंज जिलों के कुल 63 न्यायाधीशों ने भाग लिया।
इस सेमिनार का मुख्य उद्देश्य न्यायिक अधिकारियों को समकालीन कानूनी विषयों पर चर्चा और विचार-विमर्श करने के लिए एक मंच प्रदान करना था। इस कार्यक्रम को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा द्वारा वर्चुअली संबोधित किया गया। अपने संबोधन में उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर प्रकाश डाला, जिनमें से प्रमुख थे न्यायाधीशों का अद्यतन विधि ज्ञान, मानव तस्करी, और न्यायिक अधिकारियों की तकनीकी दक्षता।
मानव तस्करी एक गंभीर सामाजिक अपराध है, जो विशेष रूप से सरगुजा संभाग जैसे क्षेत्रों में एक ज्वलंत मुद्दा बना हुआ है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने इसे समाज के लिए एक ‘कलंक’ कहा और इसे रोकने के लिए व्यापक विधिक हस्तक्षेप की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि मानव तस्करी को समाप्त करने के लिए निवारक रणनीतियों का विकास करना और समाज में इस अपराध के प्रति जागरूकता बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है। उनका विश्वास था कि इस सेमिनार के माध्यम से प्रतिभागी इस दिशा में ठोस कदम उठाने में सक्षम होंगे।
माननीय मुख्य न्यायाधीश और न्यायाधीशों से आग्रह किया कि वे विधि में हो रहे परिवर्तनों से खुद को अद्यतन रखें। उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों के लिए यह आवश्यक है कि वे नवीनतम न्याय दृष्टांतों, विधि अवधारणाओं और कानूनी शोध पर ध्यान केंद्रित करें। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि तकनीकी दक्षता न्यायपालिका के लिए अब अपरिहार्य हो चुकी है। डिजिटल युग में, न्यायिक अधिकारियों को ऑनलाइन कानूनी संसाधनों और डेटाबेस का प्रभावी ढंग से उपयोग करना आना चाहिए ताकि वे अपने निर्णयों को और अधिक सटीक और तेज बना सकें।
चीफ जस्टिस ने इस बात पर भी जोर दिया कि अब रिसर्च वर्क के लिए लंबे समय तक पुस्तकालयों में समय बिताने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि एसएससी ऑनलाइन, लाइव लॉ, माननीय ट्रिब्यून जैसी वेबसाइटों के माध्यम से कानूनी जानकारी को तुरंत प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने न्यायिक अधिकारियों से इन संसाधनों का अधिकतम लाभ उठाने की अपील की।
चीफ जस्टिस ने न्यायिक अधिकारियों से आग्रह किया कि वे समकालीन चुनौतियों का समाधान करने के लिए तैयार रहें। न्यायिक प्रणाली की समग्र दक्षता और प्रभावशीलता में सुधार करना समय की मांग है, और इसके लिए विधिक और तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ अनुभवों का आदान-प्रदान भी जरूरी है। इस संदर्भ में, उन्होंने इस सेमिनार को न्यायिक अधिकारियों के बीच विचार-विमर्श और सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान के लिए एक विशिष्ट मंच बताया।
इस डिवीजनल सेमिनार में प्रमुख कानूनी विषयों पर विचार-विमर्श हुआ, जिसमें उत्तराधिकार विधि, गिरफ्तारी, रिमांड, बेल, डिक्री का निष्पादन, कमीशन रिपोर्ट और उसकी साक्ष्य में स्वीकार्यता, और मानव तस्करी जैसे ज्वलंत मुद्दे शामिल थे। इन विषयों पर गहन विचार-विमर्श ने न्यायिक अधिकारियों को उनके दैनिक न्यायिक कार्यों में अधिक दक्ष और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
इस सेमिनार के माध्यम से न्यायिक अधिकारियों को अद्यतन विधिक ज्ञान, मानव तस्करी के प्रति संवेदनशीलता, और तकनीकी दक्षता के महत्व को समझने का अवसर मिला। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा के मार्गदर्शन में आयोजित यह सेमिनार न केवल न्यायपालिका को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि समाज के कल्याण और मानव तस्करी जैसे अपराधों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की दिशा में भी एक सार्थक प्रयास है।