Saturday, August 30, 2025
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राजधानी में प्रशासन की नाकामी से खतरनाक चाइनीज मांझे से 7 साल के मासूम की दर्दनाक मौत, पिता के साथ गार्डन घूमने जा रहा था बच्चा…

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में चाइनीज मांझे की वजह से एक और मासूम की जान चली गई। टिकरापारा इलाके में रविवार को हुए इस हादसे ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। चाइनीज मांझे पर प्रतिबंध होने के बावजूद इसका इस्तेमाल लोगों की जिंदगियों को खतरे में डाल रहा है।

रविवार को टिकरापारा के राधाकृष्ण मंदिर के पास 7 साल का मासूम पुष्कर अपने पिता धनेश के साथ बाइक से गार्डन घूमने जा रहा था। अचानक सड़क पर फंसा पतंग का मांझा बच्चे के गले में फंस गया। चाइनीज मांझे की धार इतनी तेज थी कि वह बच्चे के गले को गहराई तक काट गई। दर्द और खून बहने की वजह से मासूम ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

पिता ने जब मासूम की चीख सुनी, तो उन्होंने तुरंत बाइक रोकी। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। बच्चे के गले से तेजी से खून बह रहा था और कोई भी मदद समय पर नहीं पहुंच सकी।

चाइनीज मांझा नायलॉन और ग्लास पाउडर से बना होता है, जो इसे बेहद धारदार और खतरनाक बनाता है। यह न सिर्फ पक्षियों और जानवरों के लिए जानलेवा है, बल्कि इंसानों की जान लेने में भी पीछे नहीं रहता। प्रशासन ने इसे प्रतिबंधित कर रखा है, लेकिन इसके बावजूद बाजारों में यह आसानी से उपलब्ध है।

चाइनीज मांझा पर प्रतिबंध होने के बावजूद इसका खुलेआम बिकना प्रशासन की नाकामी को दर्शाता है। हर साल इस घातक मांझे की वजह से कई जानें जाती हैं, लेकिन प्रशासन इस पर रोक लगाने में विफल साबित हो रहा है। इस घटना ने एक बार फिर सवाल उठाया है कि आखिर कब तक लोग इस खतरनाक मांझे का शिकार होते रहेंगे?

आवश्यक कदम

1. कड़ी निगरानी: प्रतिबंधित मांझे के विक्रेताओं पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
2. सख्त कानून: चाइनीज मांझा बेचने और खरीदने वालों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान होना चाहिए।
3. जागरूकता अभियान: आम जनता को चाइनीज मांझे के खतरों के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए।
4. ऑपरेशन क्लीन-अप: बाजार और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर चाइनीज मांझे की बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगाई जानी चाहिए।

यह सिर्फ प्रशासन का काम नहीं है, बल्कि समाज की भी जिम्मेदारी है कि वह इस खतरनाक मांझे का इस्तेमाल न करे। बच्चों की जान बचाने के लिए हमें खुद भी सतर्क और जागरूक होना होगा।

रायपुर की यह घटना दिल दहला देने वाली है। मासूम पुष्कर की जान बचाई जा सकती थी, अगर प्रतिबंधित मांझे पर सही तरीके से रोक लगाई गई होती। अब वक्त आ गया है कि प्रशासन और जनता मिलकर इस समस्या का समाधान निकालें, ताकि किसी और मासूम की जिंदगी यूं खत्म न हो।

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