छत्तीसगढ़ में नगरीय निकाय चुनावों के बाद त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की प्रक्रिया जोरों पर है। इस दौरान कांग्रेस पार्टी में अनुशासनहीनता के आरोपों के चलते कई नेताओं पर सख्त कार्रवाई की गई है। बिलासपुर जिला कांग्रेस कमेटी ने भी इस दिशा में कदम उठाते हुए कांग्रेस नेता त्रिलोकचंद श्रीवास को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में छह साल के लिए निष्कासित कर दिया है।
जिला कांग्रेस कमेटी ने त्रिलोक श्रीवास पर पार्टी अनुशासन तोड़ने और अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया है। उन पर यह भी आरोप लगाया गया कि उन्होंने अपनी पत्नी स्मृति श्रीवास को पंचायत चुनाव में पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के विरुद्ध खड़ा किया और नगर निगम बिलासपुर के वार्ड क्रमांक 68 में कांग्रेस प्रत्याशी के खिलाफ अपने परिवार के सदस्य को उतारा।
इसके अलावा, त्रिलोक श्रीवास के खिलाफ 2008, 2013, 2018 विधानसभा चुनावों और 2019, 2023 के अन्य चुनावों में पार्टी प्रत्याशियों के खिलाफ काम करने की शिकायतें दर्ज थीं। इन सभी मामलों को ध्यान में रखते हुए जिला स्तरीय चयन समिति ने सर्वसम्मति से उन्हें कांग्रेस से निष्कासित करने का निर्णय लिया। बैठक में विधायक दिलीप लहरिया, अटल श्रीवास्तव, पूर्व विधायक रश्मि सिंह और अन्य वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे।
अपने निष्कासन पर त्रिलोक श्रीवास ने मीडिया के सामने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वह अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी पिछड़ा वर्ग विभाग के राष्ट्रीय समन्वयक हैं और उत्तर प्रदेश तथा गुजरात के प्रभारी भी हैं। उन्होंने किसी भी प्रकार की पार्टी विरोधी गतिविधि में संलिप्त होने से इनकार किया। उनका कहना है कि उन्होंने नगर निगम चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी प्रमोद नायक के पक्ष में पूरी निष्ठा से काम किया, जिसका प्रमाण स्वयं प्रमोद नायक द्वारा जारी समर्थन पत्र है।
त्रिलोक श्रीवास के अनुसार, पंचायत चुनाव पार्टी-आधारित नहीं होते, इसलिए उनकी पत्नी का चुनाव लड़ना अनुशासनहीनता की श्रेणी में नहीं आता। उन्होंने आरोप लगाया कि जिला कांग्रेस अध्यक्ष विजय केसरवानी व्यक्तिगत द्वेष के कारण उनके खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं। श्रीवास का कहना है कि उन्होंने इस मामले की शिकायत अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अनुशासन समिति के राष्ट्रीय सचिव तारीख अनवर से की थी, जिन्होंने इसे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज को भेज दिया है।
त्रिलोक श्रीवास का यह भी दावा है कि जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने बसपा नेता देव कुमार कनेरी की पत्नी को समर्थन दिया, जो स्वयं कभी कांग्रेस की सदस्य भी नहीं रही हैं। यह कांग्रेस के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकता है क्योंकि इससे पार्टी के अंदर गुटबाजी और व्यक्तिगत हितों की राजनीति उजागर होती है।
त्रिलोक श्रीवास ने कहा कि पंचायत चुनावों के बाद वह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष से इस मामले की शिकायत करेंगे। उनका मानना है कि जिला कांग्रेस कमेटी की नीतियां पार्टी को कमजोर कर रही हैं और वरिष्ठ नेताओं को इस पर ध्यान देना चाहिए।
बिलासपुर में त्रिलोक श्रीवास का निष्कासन कांग्रेस पार्टी में गहरे अंतर्विरोधों को उजागर करता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व इस मामले पर क्या रुख अपनाते हैं। क्या यह एक सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई थी या फिर आंतरिक गुटबाजी का परिणाम? यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।