बिलासपुर, 12 जुलाई 2025
छत्तीसगढ़ के प्रमुख चिकित्सा संस्थान सिम्स (SIMS) ने नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम की है। पहली बार सिम्स में आंख के तिरछेपन (Strabismus) और झुकी पलक (Ptosis) की संयुक्त सर्जरी पूरी तरह सफल रही है। इस जटिल ऑपरेशन से न सिर्फ एक युवा मरीज को नई दृष्टि और आत्मविश्वास मिला, बल्कि यह सिम्स के लिए एक मेडिकल माइलस्टोन भी बन गया।
बेमेतरा निवासी 21 वर्षीय युवक जन्म से ही दायीं आंख की झुकी हुई पलक और तिरछेपन की समस्या से जूझ रहा था। वर्षों तक इलाज की तलाश में भटकते हुए उसने उम्मीद खो दी थी। लेकिन जब उसे सिम्स में इस प्रकार की जटिल सर्जरी की उपलब्धता की जानकारी मिली, तो उसने संपर्क किया और यहीं से एक नई शुरुआत हुई।
विशेषज्ञ टीम का बेजोड़ प्रयास
मरीज की संपूर्ण जांच के बाद वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रभा सोनवानी और उनकी टीम ने ऑपरेशन की योजना बनाई। यह सर्जरी सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लाखन सिंह और नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सुचित सिंह के मार्गदर्शन में संपन्न हुई। ऑपरेशन में डॉ. आरूषी शर्मा और डॉ. कुणाल सिंह भी शामिल रहे। नर्सिंग स्टाफ और अन्य सहयोगी स्टाफ ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
जटिलता में छिपी थी सफलता की राह
इस प्रकार की संयुक्त सर्जरी अत्यंत जटिल मानी जाती है क्योंकि इसमें पलक की मांसपेशियों और आंख की दिशा नियंत्रित करने वाली मांसपेशियों दोनों पर सटीक और समन्वित हस्तक्षेप करना होता है। सिम्स के इतिहास में यह पहली बार हुआ जब किसी एक ही मरीज की आंख में दोनों विकारों का एक साथ ऑपरेशन किया गया।
रोगी को मिला नया आत्मविश्वास
ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा। अब मरीज की पलक सामान्य स्थिति में है और तिरछापन पूरी तरह ठीक हो गया है। इससे न केवल उसकी दृष्टि बेहतर हुई है, बल्कि मानसिक और सामाजिक रूप से भी वह पहले से अधिक आत्मविश्वास से भर गया है।
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को बड़ी राहत
जहां पहले इस प्रकार के जटिल ऑपरेशन केवल बड़े निजी अस्पतालों में महंगे शुल्क पर ही संभव थे, वहीं अब सिम्स में यह सुविधा आयुष्मान भारत योजना के तहत निशुल्क उपलब्ध है। इससे प्रदेश के हजारों आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को उम्मीद की किरण मिलेगी।