रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों पर भारतीय जनता पार्टी ने पलटवार करते हुए उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। मामला बलौदाबाजार जिले के एक आदिवासी छात्रावास में कथित रूप से 32,000 रुपये प्रति वाटर जग की दर से की गई खरीद से जुड़ा है, जिसे लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला था।
कांग्रेस ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के जरिए दावा किया कि बलौदाबाजार जिले के आदिवासी छात्रावासों में वाटर जग की खरीद में भारी भ्रष्टाचार हुआ है। पोस्ट के अनुसार, एक वाटर जग की कीमत 32,000 रुपये बताई गई और 160 जग के लिए कुल 51 लाख रुपये का भुगतान किया गया।
इस गंभीर आरोप के बाद प्रदेश की सियासत में हलचल मच गई। कांग्रेस ने इसे “जनजातीय मुख्यमंत्री का कमीशन” बताते हुए बीजेपी सरकार और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय पर सीधा हमला बोला। दीपक बैज ने इसे जनजातीय समाज के साथ विश्वासघात बताया।
कांग्रेस के इन आरोपों को बीजेपी ने “झूठ का पुलिंदा” करार दिया। बीजेपी मीडिया सेल ने सिविल लाइन थाना रायपुर में दीपक बैज के खिलाफ पुलिस शिकायत दर्ज कराई। बीजेपी नेताओं का कहना है कि यह पूरी तरह से भ्रामक जानकारी है, जिसका उद्देश्य प्रदेश की जनता में भ्रम फैलाना और मुख्यमंत्री की छवि खराब करना है।
बीजेपी सोशल मीडिया सेल के सह-संयोजक मितुल कोठारी ने कहा, “न तो कोई वाटर जग खरीदा गया है, न ही भुगतान किया गया है। यह पूरी तरह से मनगढ़ंत और राजनीतिक लाभ के लिए फैलाई गई अफवाह है। दीपक बैज ने झूठा प्रचार कर जनता को गुमराह करने का प्रयास किया है।”
बलौदाबाजार जिले के आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त ने भी कांग्रेस के दावों को नकारते हुए कहा कि ऐसी कोई खरीदी विभाग द्वारा नहीं की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि न तो किसी प्रकार की फाइल चली है और न ही किसी को भुगतान किया गया है। विभाग ने कांग्रेस के आरोपों को “भ्रामक और तथ्यहीन” बताया।
इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति को नए सिरे से गरमा दिया है। आगामी निकाय चुनावों की पृष्ठभूमि में कांग्रेस और बीजेपी के बीच इस तरह की तीखी बयानबाजी अब आम होती जा रही है। जहां कांग्रेस इसे आदिवासी हितों से जुड़ा मुद्दा बता रही है, वहीं बीजेपी इसे “झूठ के सहारे राजनीतिक रोटी सेंकने की कोशिश” बता रही है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद दोनों दलों की सोशल मीडिया रणनीति और जनभावनाओं को प्रभावित करने की कोशिशों का हिस्सा है। वहीं, प्रशासनिक स्तर पर इस मामले की जांच और तथ्य सामने आने पर ही पूरी सच्चाई सामने आ सकेगी।