बिलासपुर, 12 अगस्त। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक बिलासपुर में दूषित प्रक्रिया के तहत भर्ती हुए 29 कर्मचारियों की सेवाएं एक बार फिर समाप्त कर दी गई हैं। यह फैसला बैंक की स्टाफ कमेटी की बैठक में लिया गया, जिसमें हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में विभागीय कार्यवाही पूरी की गई।
जानकारी के मुताबिक, पंकज तिवारी सहित कुल 29 पूर्व में बर्खास्त कर्मचारी हाईकोर्ट बिलासपुर पहुंचे थे (पिटीशन क्रमांक 3346/2020)। इस पिटीशन के खिलाफ बैंक ने रिट अपील क्रमांक 307/2025 दायर की थी। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के तहत बैंक को आदेश दिया कि मामले में निर्धारित समय सीमा में विभागीय कार्यवाही की जाए।
इसके बाद बैंक के सीईओ ने 4 वरिष्ठ शाखा प्रबंधकों की जांच टीम गठित की, जिसने व्यक्तिगत सुनवाई के साथ रिपोर्ट प्रस्तुत की। स्टाफ कमेटी की 04, 05 और 08 अगस्त 2025 को हुई बैठकों में 1 शाखा प्रबंधक, 4 सहायक लेखापाल, 8 पर्यवेक्षक, 6 लिपिक सह कंप्यूटर ऑपरेटर और 10 समिति प्रबंधकों — कुल 29 कर्मचारियों को पुनः सेवा से पृथक करने का निर्णय लिया गया।
इन कर्मचारियों ने इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने 12 अगस्त 2025 को उनकी याचिका खारिज कर दी। इस बीच, बैंक ने मामले में हाईकोर्ट में केविएट भी दायर कर दी है, ताकि भविष्य में बिना पक्ष सुने कोई आदेश पारित न हो।
बैंक प्रबंधन का कहना है कि यह कार्रवाई भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और संस्थान की साख बनाए रखने के लिए आवश्यक थी। वहीं, कर्मचारियों के पक्ष से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।