बिलासपुर। देश की रक्षा करते हुए शहादत देने वाले जवानों को हमेशा से सर्वोच्च सम्मान का हकदार माना जाता है, लेकिन बिलासपुर जिले के ग्राम नरगोड़ा (तहसील मस्तूरी) के वीर पुत्र लांस नायक शहीद वीरेंद्र कुमार केवर्त के मामले में यह हक अब तक अधूरा है।
भारतीय सेना की 225 मीडियम रेजीमेंट में तैनात वीरेंद्र कुमार 62 राष्ट्रीय राइफल्स (जम्मू-कश्मीर) के साथ विशेष आतंकवाद विरोधी अभियान में शामिल थे। 15 सितंबर 2006 को पुलवामा जिले के गोगल गांव में आतंकियों के खिलाफ चल रहे अभियान में दुश्मनों द्वारा बिछाए गए आईईडी धमाके में वे वीरगति को प्राप्त हुए। उस समय उनकी उम्र मात्र 25 वर्ष थी।
शहीद को गुज़रे करीब 19 साल हो चुके हैं, लेकिन यह बेहद दुःखद है कि उनके परिजनों को आज तक कोई सरकारी मान्यता या सहायता नहीं दी गई। परिजनों का कहना है कि शासन-प्रशासन की अनदेखी ने उन्हें आहत किया है।
बिलासपुर जिले के लगभग 3000 पूर्व सैनिकों के संगठन और ग्राम नरगोड़ा के ग्रामीणों ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि शहीद वीरेंद्र कुमार के परिवार को न्याय दिलाया जाए।
आन पूर्व सैनिक कल्याण संगठन, बिलासपुर संभाग (छ.ग.) ने अपनी मांगें रखते हुए कहा है कि –
- ग्राम नरगोड़ा में शहीद वीरेंद्र कुमार के नाम पर शासकीय विद्यालय, सड़क या अन्य सार्वजनिक स्थल का नामकरण किया जाए।
- प्रत्येक वर्ष 15 सितंबर को शासकीय स्तर पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित हो।
- शहीद परिवार को शासन द्वारा निर्धारित सभी सुविधाएं और अधिकार शीघ्र प्रदान किए जाएं।
“शहीदों के सम्मान से ही बढ़ेगा जवानों का आत्मबल”
संगठन का कहना है कि यदि शहीद परिवारों को उनका सम्मान और हक नहीं मिलेगा, तो यह उन जवानों के आत्मबल पर भी चोट करेगा, जो देश की सीमाओं पर डटे हुए हैं।
प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की अपील
पूर्व सैनिक संगठन और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन तथा राज्य सरकार से आग्रह किया है कि इस मामले में गंभीरता दिखाते हुए जल्द से जल्द ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि शहीद वीरेंद्र कुमार के बलिदान को उचित सम्मान मिल सके।