बिलासपुर/कोटा। बिलासपुर जिले के कोटा थाना क्षेत्र अंतर्गत बेलगहना चौकी के ग्राम कसईबहरा में छठी कार्यक्रम की खुशियां उस वक्त मातम में बदल गईं, जब शराब पीकर पहुंचे एक युवक के साथ हुए विवाद ने हत्या का रूप ले लिया। आरोप है कि तीन युवकों ने मिलकर युवक को पहले कार्यक्रम स्थल पर बेरहमी से लात-घूंसों और मुक्कों से पीटा, फिर उसे सीसी रोड पर घसीटते हुए घर के पास छोड़ दिया। गंभीर अंदरूनी चोटों के कारण उसकी मौत हो गई। पुलिस ने हत्या के तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है।
पुलिस के अनुसार, 8 जुलाई की रात लगभग 12 बजे डायल-112 के माध्यम से ग्राम कसईबहरा में अमरसिंह पेन्द्रो की हत्या की सूचना मिली। सूचना मिलते ही बेलगहना चौकी पुलिस मौके पर पहुंची, जहां अमरसिंह अपने घर में मृत अवस्था में मिला। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह को तत्काल जानकारी दी गई। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) माधुलिका सिंह तथा एसडीओपी नुपूर उपाध्याय के निर्देशन में एफएसएल टीम के साथ घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया गया।
जांच में सामने आया कि 7 जुलाई की शाम अमरसिंह अपने पड़ोसी मोतीलाल पोर्ते के घर आयोजित छठी कार्यक्रम में शामिल होने गया था। इसी दौरान रोहित पोर्ते, दीपक पोर्ते और प्रदीप वाकरे ने उससे शराब पीकर कार्यक्रम में आने और माहौल खराब करने का आरोप लगाते हुए घर जाने को कहा। जब अमरसिंह वहां से नहीं गया तो तीनों ने कथित तौर पर एक राय होकर उस पर लात, घूंसों और मुक्कों से ताबड़तोड़ हमला कर दिया।
पुलिस के मुताबिक, मारपीट इतनी बर्बर थी कि अमरसिंह के शरीर में गंभीर अंदरूनी चोटें आईं। उसकी पत्नी चंद्रकली ने बीच-बचाव कर हमलावरों को रोकने की कोशिश की, लेकिन आरोपियों ने उसकी एक नहीं सुनी। इसके बाद देर रात तीनों आरोपी अमरसिंह को कार्यक्रम स्थल से लगभग 60 से 65 मीटर तक सीसी रोड पर घसीटते हुए उसके घर के पास छोड़कर फरार हो गए।
घायल अमरसिंह किसी तरह घर पहुंचा और अपने परिजनों को पूरी घटना की जानकारी देने के बाद सो गया। रात में जब परिवार ने उसे खाना खाने के लिए जगाने की कोशिश की तो उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। जांच करने पर उसकी मौत हो चुकी थी।
विवेचना के दौरान पुलिस ने संदेह के आधार पर रोहित पोर्ते (30), दीपक पोर्ते (23) और प्रदीप वाकरे (21), सभी निवासी कसईबहरा, को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में तीनों ने घटना में अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली। साक्ष्यों, गवाहों के बयान, घटनास्थल निरीक्षण और प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर तीनों के खिलाफ धारा 103(1) एवं 3(5) भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत मामला दर्ज कर 10 जुलाई को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया।
पूरे मामले की कार्रवाई में उप निरीक्षक बी.एन. बनाफर, सहायक उप निरीक्षक भरतलाल राठौर, आरक्षक संजय कश्यप, रविकुमार कंवर, रविकुमार यादव तथा एफएसएल टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।


