बिलासपुर। मोबाइल फोन गुम होना आज सिर्फ एक महंगे उपकरण के खोने तक सीमित नहीं है। मोबाइल में बैंकिंग से लेकर निजी दस्तावेज, फोटो, संपर्क और कई महत्वपूर्ण जानकारियां सुरक्षित रहती हैं। ऐसे में मोबाइल खोने के बाद उसे वापस पाने की उम्मीद अक्सर खत्म हो जाती है। लेकिन बिलासपुर पुलिस ने इसी उम्मीद को हकीकत में बदलने की दिशा में बड़ी कामयाबी हासिल की है।
गुम मोबाइल की बरामदगी और उन्हें उनके वास्तविक मालिकों तक पहुंचाने के मामले में बिलासपुर पुलिस पूरे छत्तीसगढ़ में प्रथम स्थान पर है। वर्ष 2026 में अब तक पुलिस ने 1250 गुम मोबाइल फोन बरामद कर उनके वास्तविक स्वामियों को वापस किए हैं। इसी कड़ी में स्वतंत्रता दिवस उत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित “चेतना अभियान” के तहत रविवार को “अर्पण” कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें 202 मोबाइल फोन उनके वास्तविक मालिकों को सौंपे गए। बरामद मोबाइल की अनुमानित कीमत करीब 30 लाख रुपये है।
अर्पण कार्यक्रम में उस समय खुशी का माहौल बन गया, जब लंबे समय से अपने मोबाइल वापस मिलने की उम्मीद छोड़ चुके लोगों को उनका फोन दोबारा उनके हाथों में मिला। मोबाइल वापस पाकर लोगों के चेहरे खिल उठे। कई लोगों के लिए मोबाइल की कीमत से ज्यादा उसमें मौजूद जरूरी दस्तावेज, फोटो, संपर्क और अन्य डेटा महत्वपूर्ण था। मोबाइल धारकों ने बिलासपुर पुलिस की इस पहल की सराहना करते हुए पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रति आभार जताया।
पुलिस उप महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बिलासपुर रजनेश सिंह के निर्देश पर गुम मोबाइल संबंधी शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए उनकी तलाश और बरामदगी के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। निर्देशों के पालन में एसीसीयू यानी साइबर सेल बिलासपुर की टीम ने तकनीकी संसाधनों का इस्तेमाल करते हुए गुम मोबाइल फोन की तलाश शुरू की।
पुलिस की तकनीकी टीम ने बिलासपुर के अलावा छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों और सीमावर्ती राज्यों तक मोबाइल फोन की तलाश की। लगातार तकनीकी पड़ताल और पुलिस के प्रयासों के बाद 202 मोबाइल फोन बरामद किए गए, जिन्हें 9 अगस्त 2026 को उनके वास्तविक स्वामियों को वापस सौंप दिया गया।
यह कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आज के दौर में मोबाइल सिर्फ बातचीत का साधन नहीं रह गया है। बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, सोशल मीडिया, व्यक्तिगत दस्तावेज और निजी तस्वीरों से लेकर कई संवेदनशील जानकारियां मोबाइल में मौजूद रहती हैं। ऐसे में गुम मोबाइल की बरामदगी आम नागरिक के लिए आर्थिक नुकसान के साथ-साथ डेटा सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद अहम है।
अर्पण कार्यक्रम के दौरान साइबर सेल की टीम ने मोबाइल लौटाने के साथ नागरिकों को साइबर अपराधों के प्रति भी जागरूक किया। साइबर सेल प्रभारी निरीक्षक गोपाल सतपथी एवं टीम ने लोगों को वर्तमान समय में सामने आ रहे विभिन्न प्रकार के साइबर फ्रॉड और उनसे बचने के उपायों की जानकारी दी।
नागरिकों को भारत सरकार के बहुउपयोगी मोबाइल एप्लीकेशन “संचार साथी” के बारे में भी बताया गया। साइबर सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी देते हुए लोगों से सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि की स्थिति में तत्काल उचित शिकायत करने की अपील की गई।
वर्ष 2026 में अब तक 1250 गुम मोबाइल फोन की बरामदगी बिलासपुर पुलिस की इस मुहिम की बड़ी उपलब्धि है। पुलिस के मुताबिक गुम मोबाइल फोन बरामद कर उनके वास्तविक स्वामियों तक पहुंचाने के मामले में बिलासपुर पुलिस पूरे राज्य में प्रथम स्थान पर है।
इस अभियान में एसीसीयू साइबर सेल बिलासपुर के साथ जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों के पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। तकनीकी टीम ने जहां मोबाइल की जानकारी और तकनीकी सुरागों के आधार पर तलाश की, वहीं थाना स्तर पर भी आवश्यक कार्रवाई की गई।
कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण एवं एसीसीयू मधुलिका सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहर पंकज कुमार पटेल, नगर पुलिस अधीक्षक सिविल लाइन परमेश्वर तिलवार और नगर पुलिस अधीक्षक सरकंडा तिलेश्वर प्रसाद यादव सहित पुलिस अधिकारी-कर्मचारी एवं मोबाइल धारक मौजूद रहे।
बिलासपुर पुलिस का “अर्पण” अभियान सिर्फ गुम मोबाइल लौटाने की कार्रवाई नहीं, बल्कि आम नागरिक और पुलिस के बीच भरोसे को मजबूत करने की पहल भी है। जिन लोगों ने अपने मोबाइल वापस मिलने की उम्मीद लगभग छोड़ दी थी, उनके हाथों में जब उनकी अमानत दोबारा पहुंची तो पुलिस की कार्रवाई का मानवीय पक्ष भी सामने आया।
तकनीक, टीमवर्क और लगातार प्रयासों के जरिए 1250 मोबाइल की बरामदगी यह संदेश देती है कि गुम हुई अमानत को वापस पाने की उम्मीद छोड़ी नहीं जानी चाहिए। पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के बाद तकनीकी जांच के जरिए मोबाइल तक पहुंचने का प्रयास किया जा सकता है।


