Friday, March 13, 2026
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बिलासपुर: कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता सूरजेवाला बोले- छत्तीसगढ़ में झूठ की बुआई… जुमलों का खाद… वोटों की फसलें, वादे नहीं याद… झांसों का खेल, रमन सिंह-मोदी दोनों फेल…


बिलासपुर/ अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सिंह सूरजेवाला ने कहा कि मोदी सरकार और छत्तीसगढ़ में रमन सिंह की भाजपा सरकार ने किसानों के साथ केवल छल-कपट किया है। लाचार, परेशान, बेबस किसान धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में आत्महत्या की ड्योढ़ी पर खड़ा है। बड़े-बड़े वादों की झड़ी लगा भाजपा ने पिछले 15 साल से छत्तीसगढ़ में किसानों को सर्वाधिक ठगा है। अन्नदाता किसान के लिए जमीन उसकी मां के बराबर है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि जिस तरह से गुलाम भारत में अंग्रेजों ने रियासतें हड़पने के लिए बेदखली के कानून बनाए थे, उसी प्रकार आजाद भारत में रमन सिंह की सरकार ने किसानों को भूमि अधिग्रहण के नाम पर जमीन से बेदखल कर पुनर्वास का प्रावधान खत्म कर दिया है। अंग्रेजों के निशाने पर छोटे और मंझले किसान थे। डॉ. रमन सिंह के निशाने पर भी छत्तीसगढ़ के किसान हैं।

उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि भारत में ‘धान का कटोरा’कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में डॉ. रमन सरकार ने किसानों की एक पूरी पीढ़ी को ही अनाथ बना दिया है। साथ ही अगली पीढ़ियों को भी तबाह करने का कानूनी इंतजाम कर दिया है। रमन हो या मोदी राज, केंद्र हो या मध्यप्रदेश, भाजपा सरकारें किसानों के लिए अभिशाप साबित हुई हैं।

न धान का समर्थन मूल्य, न बोनस

उन्होंने कहा कि पांच साल पहले भाजपा ने 2013 के विधानसभा चुनाव के घोषणा पत्र में धान का न्यूनतम मूल्य 2100 रु. प्रति क्विंटल करने का वादा किया था। इसके अलावा 5 साल तक हर साल धान की फसल पर 300 रु. प्रति क्विंटल बोनस का वादा किया था। पांच साल बीत जाने के बाद भी किसान का धान 1550 रु. प्रति क्विंटल में बिक रहा है। हार की कगार पर खड़ी मोदी सरकार ने एक राजनैतिक लालीपाप के जुमले की तरह 1 जुलाई 2018 को धान के समर्थन मूल्य पर 200 रु. प्रति क्विंटल के बोनस की घोषणा की, जिस पर रमन सिंह सरकार ने ‘उत्सव मनाने’की घोषणा कर डाली। यह एक क्रूर मजाक साबित हुआ, क्योंकि छत्तीसगढ़ के किसानों को 1550 रु. समर्थन मूल्य भी नहीं मिल रहा।

किसान का एक-एक दाना धान खरीदी के संकल्प के बाद भी साल 2014 से प्रति-एकड़ 15 क्विंटल धान खरीदने की अधिकतम सीमा निर्धारित कर दी। यही नहीं, राज्य में कुल किसान 37.46 लाख हैं, पर धान खरीदी हो रही है, मात्र 14 लाख किसानों से।

उन्होंने कहा कि ऊपर से किसानों के धान की दूसरी फसल यानी कि ग्रीष्मकालीन धान को न्यूनतम समर्थन मूल्य में खरीदने की कोई व्यवस्था नहीं। साल 2013-14 में 80 लाख टन से धान गिरकर 2017-18 में पहुंचा मात्र 73 लाख टन। यानी लगभग 10 प्रतिशत की कटौती और किसान को हजारों करोड़ का नुकसान।

फसल बीमा का लाभ किसानों से छीन बीमा कंपनियों की जेब में

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में पिछले एक साल में 27 में से 21 जिले सूखे की चपेट में आए। केंद्र में मोदी सरकार होने के बावजूद वादे के अनुसार रमन सिंह सरकार ‘सूखा राहत पैकेज’ लाने में फेल साबित हुई।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना सिर्फ ‘कागजी शेर’बनकर रह गई और सिर्फ बीमा कंपनियों को मुनाफा हुआ। खरीफ 2016, रबी 2016-17 व खरीफ 2017 में छत्तीसगढ़ के किसानों ने निजी बीमा कंपनियों को फसल बीमा योजना राशि जमा करवाई- 645.39 करोड़ रु. और उन्होंने किसानों को मुआवज़ा दिया मात्र 290 करोड़ और किसान की कीमत पर मुनाफा कमाया 351 करोड़, यानी कि 55 प्रतिशत मुनाफा। इसी प्रकार पूरे देश में भी बीमा कंपनियों ने फसल बीमा योजना से 3 फसल सीज़न में 16099 करोड़ का मुनाफा कमाया। छत्तीसगढ़ में तो किसानों को फसल बीमा योजना में 2.92 रु. तक का मुआवजा भी मिला। देश के इतिहास में ऐसा धोखा किसानों के साथ कभी नहीं हुआ।

हर रोज 3 किसान-मज़दूर आत्महत्या को मजबूर

सूरजेवाला ने कहा कि छत्तीसगढ़ में हर आठ घंटे में एक किसान-मज़दूर आत्महत्या को मजबूर है। केंद्र सरकार ने लोकसभा में बताया कि 2014-16 में छत्तीसगढ़ में 2391 किसान-मजदूरों ने आत्महत्या की। यानी कि लगभग हर आठ घंटे में एक किसान-खेत मज़दूर द्वारा आत्महत्या। खुद छत्तीसगढ़ सरकार ने भी विधानसभा के पटल पर 21 दिसंबर 2017 को माना कि 1 अप्रैल, 2015 से 30 अक्टूबर 2017 तक। यानी कि डेढ़ साल में 1344 किसानों ने आत्महत्या की। यह अपने आपमें रमन सिंह सरकार की नाकामी की कहानी बताती है।

किसान का हक दिया उद्योगपतियों के हिस्से

उन्होंने कहा कि रमन सिंह सरकार ने कांग्रेस सरकार द्वारा लाई गई ‘सिंचाई-बांध-नहर योजनाओं’के तहत पानी के उपयोग का अधिकार किसानों से छीन कर उद्योगों को दे डाला। राज्य गठन के समय (साल 2000) कुल सिंचाई क्षमता 13.78 लाख हेक्टेयर थी। कांग्रेस के शासन के पहले तीन साल में कुल 2.23 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षमता निर्मित हुई। इसके विपरीत पिछले 15 सालों में डॉ. सिंह सरकार के मुताबिक भी मात्र 5 लाख हेक्टेयर की सिंचाई क्षमता अर्जित की गई। इस पर भी शक है, क्योंकि राजस्व विभाग के साल 2017-18 के प्रशासकीय प्रतिवेदन में सिंचित भूमि मात्र 18.45 लाख हेक्टेयर बताई गई। यानी कि 15 सालों में मात्र 3.5 लाख हेक्टेयर की वृद्धि।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में पूरे राज्य में नहरों का जाल बिछाया गया था, लेकिन भाजपा शासित 15 सालों में रमन सिंह सरकार ने महानदी का पानी अपने सूट-बूट मित्रों के लिए कम पड़ जाने के खौफ से एक भी नहर नहीं बनाई। इतिहास में पहली बार रमन सिंह सरकार ने जनता को बरगला कर ‘रोगदा बांध’बेच डाला। यही हाल इंद्रावती, शिवनाथ, खारुन, अर्पा आदि जीवन देने वाली नदियों के साथ किया गया।

खेती पर लगाया टैक्स

सूरजेवाला ने कहा कि 71 साल में पहली बार भाजपा की केंद्र सरकार ने खेती पर टैक्स लगाया। खाद पर 5 प्रतिशत जीएसटी, कीटनाशक दवाइयों पर 18 प्रतिशत जीएसटी, ट्रैक्टर व खेती के अन्य उपकरणों पर 12 प्रतिशत जीएसटी, ट्रैक्टर टायर व ट्रांसमिशन पर 18 प्रतिशत जीएसटी। दूसरी तरफ खाद की कीमतें आसमान को छू रही हैं। डीएपी खाद की कीमत 2014 में 1075 रु. प्रति 50 क्विंटल से बढ़कर 1450 रु. क्विंटल पहुंच गई है। हर साल किसान देश में 89.80 लाख टन डीएपी खरीदता है। यानी कि अकेले डीएपी खरीद पर उसे 3400 करोड़ रु. की चपत लगी। यूरिया खाद के 50 किलो के कट्टे का वजन चालाकी से घटाकर 45 किलो कर दिया, परंतु कीमतें वही रहीं। पोटाश खाद के 50 किलो के कट्टे की कीमत 4.5 साल में 505 रु. बढ़ गई। यानी कि मई, 2014 में 450 रु. प्रति 50 किलो से बढ़कर आज 969 रु. प्रति 50 किलो। ‘सुपर’खाद के 50 किलो के कट्टे की कीमत भी 260 रु. से बढ़ाकर 310 रु. कर दी।

डीज़ल की बढ़ती कीमतों ने तोड़ी किसान की कमर

उन्होंने बताया कि मई 2014 में कच्चे तेल की कीमत 108 डॉलर प्रति बैरल थी। परंतु डीज़ल का भाव 55.49 रु. प्रति लीटर था। आज कच्चे तेल का भाव 78 डालर प्रति बैरल है, परंतु डीज़ल की कीमत 77.24 रु. प्रति लीटर। यानी कि पिछले चार सालों में अकेले डीज़ल के भाव में 21.75 रु. प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। कारण स्पष्ट है। मोदी सरकार ने डीज़ल पर 447 प्रतिशत केंद्रीय एक्साइज़ शुल्क बढ़ा दिया और पेट्रोल पर 211 प्रतिशत। इसी प्रकार रमन सिंह सरकार में डीज़ल पर प्रांतीय वैट 25.78 प्रतिशत है, जो देश में दूसरे नंबर पर सबसे अधिक है। 12 लाख करोड़ रुपया चार साल में मोदी सरकार ने कमाया और हजारों करोड़ रुपया रमन सिंह सरकार ने।

किसानों के नाम पर घोटाले

उन्होंने कहा कि पीडीएस के तहत छत्तीसगढ़ में गरीब खेतिहर मजदूरों को 35 किलो चावल मिलता था। आज रमन सिंह सरकार का तीसरा कार्यकाल खत्म होने तक यह मात्रा घट कर सिर्फ 7 किलो रह गई है। सरकारी चावल की मात्रा घटाने व गरीब के पेट से छीनने पर सरकार पर मौन है। छत्तीसगढ़ का किसान पुकार-पुकार कर कह रहा है कि अब रमन सिंह सरकार को उखाड़ फेंकने का समय आ गया है।

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