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किसान बिल पर मचा हंगामा: कृषि विधेयक के खिलाफ 25 सितंबर को पूरे देश में चक्का जाम, टिकैत ने कहा-‘नाइंसाफी बर्दाश्त नहीं’

कृषि विधेयक के खिलाफ हरियाणा और पंजाब के किसान संड़कों पर उतर आए हैं, किसानों की मांग है कि सरकार के ये विधेयक किसान विरोधी हैं और इन्हें तत्काल वापस लिया जाए और इसी वजह से भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) समेत विभिन्न किसान संगठनों ने 25 सिंतबर को देशभर में चक्का जाम करने का ऐलान किया है।

किसान बिल पर मचा हंगामा

पूरे देश में 25 सितंबर को चक्का जाम रहेगा: टिकैत
इस बारे में बात करते हुए भाकियू के प्रवक्ता और उत्तर प्रदेश के किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि कृषि विधेयकों के विरोध में पूरे देश में 25 सितंबर को चक्का जाम रहेगा, जिसमें पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, कर्नाटक समेत तकरीबन पूरे देश के किसान संगठन अपनी विचारधाराओं से ऊपर उठकर एकजुट होंगे, हम नाइंसाफी बर्दाश्त नहीं करेंगे।

पंजाब और हरियाणा

‘केंद्र सरकार ने किसानों को फुसलाने का किया है काम’ तो वहीं पंजाब और हरियाणा के किसानों ने कहा है कि वे कृषि विधेयकों को बिल्कुल स्वीकर नहीं करेंगे लेकिन वो शांतिपूर्ण आंदोलन करेंगे, किसान को-आर्डिनेशन कमेटी के सदस्य सतनाम सिंह बहिरू ने पटियाला में कहा कि केंद्र सरकार ने किसानों को फुसलाने के लिए एमएसपी में जो बढ़ोतरी की है, वह बेहद मामूली है। यह एलान किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है, हम इसे स्वीकार नहीं सकते हैं।

कृषि विधेयक पर राजनीति गर्म

मालूम हो कि कृषि विधेयक पर राजनीति भी गरमा गई है, उत्तर प्रदेश में भारतीय किसान संगठन के प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र यादव ने भी कहा है कि 25 सितंबर के भारत बंद में उनका संगठन भी शामिल है, यादव ने कहा कि यह किसानों का मसला है, इसलिए किसी भी दल से जुड़े किसान संगठनों हों उनको इसमें शामिल होना चाहिए तो वहीं शिरोमणि अकाली दल (शिअद) समेत कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस व अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने सरकार के इस कदम को किसान विरोधी बताया है।

केंद्र सरकार ने तीनों विधेयकों को किसान हितैषी बताया है

विपक्ष ने राष्ट्रपति से की हस्ताक्षर ना करने की अपील
जबकि केंद्र सरकार ने तीनों विधेयकों को किसान हितैषी बताया है, मालूम हो कि कृषि से जुड़े तीन अहम विधेयकों, कृषक उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सुविधा) विधेयक 2020, कृषक (सशक्तीकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक 2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक-2020 को भी संसद की मंजूरी मिल चुकी है, अब ये बिल राष्ट्रपति कोविंद के पास हस्ताक्षर के लिए जाएगा , जिसके बाद ये बिल कानून का रूप ले लेगा लेकिन एक दिन पहले ही विपक्षी दल के सांसदों ने राष्ट्रपति से गुहार लगाई है कि वो कृषि बिल पर हस्ताक्षर न करें और उन्हें वापस भेज दें, इस सिलसिले में राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष कांग्रेस के ग़ुलाम नबी आजाद ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात की और विपक्षी सांसदों की तरफ से राष्ट्रपति को एक ज्ञापन सौंपा है।

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