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वैज्ञानिकों का दावा कोरोना को लेकर कहा, रिपोर्ट निगेटिव आने पर भी रहें सतर्क

वैज्ञानिकों का दावा कोरोना को लेकर कहा, रिपोर्ट निगेटिव आने पर भी रहें सतर्क

बीते कई दिनों से लगातार बढ़ता जा रहा कोरोना का प्रकोप अब थमने का नाम ही नहीं ले रहा है, जंहा देखों इस वायरस की दहशत ने लोगों के दिल और दिमाग को हिलाकर रख दिया है. हर दिन इस वायरस की चपेट में आने से कई हजारों लोगों की मौते हो चुकी है. वहीं इस वायरस का संक्रमण इस गति से फ़ैल रहा है की लोगों की जान का दुश्मन बनता जा रहा है, जंहा अब तक दुनियाभर में 1 लाख 19 हजार से भी अधिक मौते हो चुकी है. भारतवंशी समेत शोधकर्ताओं के एक दल ने कोरोना वायरस टेस्ट के नतीजों को लेकर आगाह किया है. उनका कहना है कि कोरोना वायरस को लेकर पूरी दुनिया में बड़े पैमाने पर टेस्ट हो रहे हैं. कई बार ऐसा भी देखने को मिल रहा है कि पहले टेस्ट निगेटिव और फिर पॉजिटिव आ जा रहे हैं. इस स्थिति में स्वास्थ्य अधिकारियों को टेस्ट निगेटिव आने पर भी सतर्क रहने की जरूरत है.

मायो क्लीनिक प्रोसिडिंग्स जर्नल में छपे अध्ययन के अनुसार, कोरोना वायरस (कोविड-19) की जांच के नतीजों पर अतिविश्वास के खतरे को लेकर सावधान रहने की जरूरत है. जांच की तकनीक रिवर्स ट्रांसक्क्रिप्‍टेज पॉलीमेरेज चेन रिएक्शन (आरटी-पीसीआर) टेस्टिंग की संवेदनशीलता अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है. अमेरिका के मायो क्लीनिक की शोधकर्ता प्रिया संपतकुमार ने कहा, ‘निगेटिव टेस्ट नतीजा आने की स्थिति में स्वास्थ्य देखभाल से जुड़े लोग संक्रमण की कम उम्मीद करते हैं.

टेस्ट पॉजिटिव आने पर आरटी पीसीआर टेस्टिंग की उपयोगिता बढ़ जाती है जबकि कोविड-19 को खारिज करने की सूरत में इस जांच की उपयोगिता कम है. शोधकर्ताओं का कहना है कि आमतौर पर निगेटिव टेस्ट का मतलब यह नहीं होता कि किसी व्यक्ति को बेफिक्र हो जाना चाहिए या उसके संक्रमित होने का खतरा नहीं है. किसी निर्णय पर पहुंचने से पहले रोगी में दिखने वाले लक्षणों के संदर्भ में जांच नतीजों पर ज्यादा गौर करने की जरूरत है.

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