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कोरोना काल में 60 से ज्यादा फैसले दे सुप्रीम कोर्ट ने बनाया रिकॉर्ड, जानें वे निर्णय जिनसे जीवन हुआ प्रभावित…

कोरोना काल में सुप्रीम कोर्ट 60 से ज्यादा फैसले दिए, जिनमें सर्वोच्च अदालत ने कई महत्वपूर्ण कानूनी सवालों के जवाब दिए। ये फैसले वर्चुअल सुनवाई के जरिए दिए गए, जो स्वयं में एक रिकॉर्ड है। इनमें से कुछ फैसले ऐसे हैं, जो कई मायनों में अहम हैं।

अग्रिम जमानत सीमित समय के लिए नहीं हो सकती

(सुशीला अग्रवाल बनाम स्टेट) : जस्टिस अरुण मिश्र (अब रिटायर) की अध्यक्षता में संविधान पीठ ने कहा गिरफ्तारी से पहले दी गई अग्रिम जमानत की कोई सीमा नहीं हो सकती। यदि कोर्ट के सामने इसी कोई स्थिति है जिसमे अभियुक्त की जमानत को सीमित करना हो , जैसे चार्जशीट दायर होने तक आदि, तो कोर्ट उसे शर्त के साथ सीमित कर सकता है अन्यथा ये असीमित ही रहेगी यानी ट्रायल का फैसला होने तक अभियुक्त जमानत पर बना रहेगा। इस फैसले से इस बहुत बड़े सवाल का जवाब मिल गया। क्योंकि सामान्य तौर पर आरोप तय कर दिए हों / या चार्जशीट दायर होते ही/ या अभियुक्त को कोर्ट द्वारा समन करते ही जमानत को समाप्त मान लिया जाता था।

अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को नियुक्ति का पूर्ण अधिकार नहीं

( प.बं. मदरसा आयोग बनाम समिउला) : सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस यू यू ललित की कयादत में तीन जजों की बेंच ने पश्चिम बंगाल मदरसा सेवा आयोग, 2008 की वैधानिकता को सही ठहराया और कहा कि अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को संस्थानों में नियुक्ति का पूर्ण अधिकार नहीं है, से कानून में हिसाब से ही नियुक्तियां कर सकते हैं। कोर्ट ने कहा कहा कि मदरसा आयोग ही संस्थानों मे नियुक्ति के लिए अधिकृत है। हालांकि इस फैसले को संविधान पीठ को भेजने के लिए अर्जी दी गई और कहा गया कि इससे पहले तीन जजों की बेंच ने ठहराया गई कि संविधान के अनुच्छेद 30 के तहत अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को अपना प्रबंधन करने को पूरा हक है।

अयोग्यता की अर्जी पर स्पीकर तीन माह में फैसला लें

(के एम सिंह बनाम स्पीकर मणिपुर विस): सर्वोच्च अदालत ने तय किया कि संविधान की 10वीं अनुसूची (दल बदल की स्थिति) के तहत स्पीकर के पास आती सांसदों या विधायकों की अयोग्यता की अर्जी, यदि कोई अपवाद न हो तो तीन माह में निर्धारित होनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि स्पीकर एक न्यायाधिकरण की तरह से जारी करता है और इसे तार्किक समय के अंदर फैसला लेना ही होगा जिसके लिए तीन माह उपयुक्त अवधि है। आर एफ नरीमन की तीन जजों की पीठ ने कहा स्पीकर इन अर्जियों को अनंत काल तक लटका नहीं सकते।इसके साथ ही कोर्ट ने बीजेपी के विधायक को विधानसभा में प्रवेश से रोक दिया था और उनका मंत्री पद भी समाप्त कर दिया था।

एससी-एस टी एक्ट संशोधन, 2018 को वैधानिक ठहराया

(पृथ्वीराज चौहान बनाम भारत संघ): सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट मे गिरफ्तारी पर रोक लगाने तथा अपील के अधिकार देने के सुप्रीम कोर्ट के मार्च 2018 के आदेश को निरस्त करने के लिए लाए गए संशोधनों को संवैधानिक ठहराया।

कोविड-19 के दौरान मुकदमे दायर किए जाने की समय सीमा में छूट

(स्वातः संज्ञान): कोविड 19 के दौरान मुकदमे दायर किए जाने की समय सीमा में छूट दी गई। लॉकडॉउन के कारण जहां तहां फंसे श्रमिकों को घर भेजने के लिए आदेश दिए गए। देश में सभी अदालतों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई के आदेश दिए गए। आयुष्मान भारत स्कीम के तहत कोरोना का टेस्ट मुफ्त मे करने का आदेश

ये फैसले भी अहम रहे

-( ठाकुर बनाम सुनील अरोड़ा): राजनीतिक दलों को उम्मीदवारों के अपराधिक रिकॉर्ड को चुनाव के दौरान तीन बार रेडियो, टीवी और अखबार में प्रकाशित करने का आदेश।

-(रक्षा मंत्रालय बनाम बबीता पूनिया आदि): महिलाओं को नौसेना और सेना में स्थायी कमीशन देने का आदेश।

-(इंदौर विकास प्रा बनाम मनोहरलाल)मुआवजा ट्रेज़री में जमा करने पर नए 2013 के कानून की धारा 24(2) अनुसार 1894 के कानून के तहत किया गया भूमि अधिग्रहण समाप्त नहीं होगा।

-निर्भया के दोषियों की मौत की सजा पर आधी रात में सुनवाई कर स्टे देने से इनकार (जस्टिस आर भानुमती की पीठ ने रात को 03:30 बजे आदेश लिखवाया गया और सुबह 05: 30 पर चारों दोषियों को तिहाड़ जेल में फांसी देदी गई )

-( शिवराज सिंह चौहान बनाम मप्र विस ): राज्यपाल सदन के चालू रहते फ्लोर टेस्ट का आदेश दे सकते हैं

-(गुजरात बनाम एम के शाह): डीम्ड विश्वविद्यालय भी भ्रष्टाचार निरोधक कानून के दायरे में

-(ए भसीन बनाम केंद्र सरकार): कश्मीर में 4 जी सेवाएं शुरू करने का अदेश देने से इंकार

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