Monday, February 2, 2026
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अब रिश्‍वत लेना ही नहीं देना भी अपराध, संसद से पास हुआ भ्रष्टाचार निरोधक संशोधन विधेयक

ताज़ाख़बर36गढ़:- भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम विधेयक संसद से पास हो गया है। मंगलवार को भ्रष्टाचार रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2018, लोकसभा में पास हुआ है, राज्यसभा से पहले ही ये बिल पास हो गया था। अब राष्ट्रपति की मुहर का इंतजार है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद इस कानून के तहत रिश्वत लेना और देना दोनों ही अपराध होगा। इस विधेयक के पास होने के बाद भ्रष्टाचार के मामलों पर लगाम लगेगी, वहीं ईमानदार कर्मचारियों को फायदा मिलेगा।

मंगलवार को भ्रष्टाचार रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2018, लोकसभा में ध्वनिमत से पास हो गया। राज्यसभा में यह बिल पिछले हफ्ते ही पास हुआ था। नए पास हुए विधेयक में 1988 के मूल कानून को संशोधित करने का प्रावधान है। संसद से इस बिल के पास होने के बाद अब राष्ट्रपति की मुहर का इंतजार है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद इस कानून के तहत रिश्वत लेना और देना दोनों अपराध होगा। अगर कोई ऐसा करते हुए पकड़े जाते हैं तो उसे सात साल तक की जेल हो सकती है। हालांकि रिश्वत देने वालों को अपनी बात रखने के लिए सात से 15 दिन का समय दिया जाएगा।

बिल पर चर्चा का जवाब देते हुए पीएमओ में राज्य मंत्री जितेन्द्र सिंह ने कहा कि यह विधेयक उन अधिकारियों को सुरक्षा प्रदान करता है जो ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का पालन करते हैं। उन्होंने कहा कि हम इसमें कई संशोधन लाए हैं जिससे ईमानदार अधिकारी भयभीत नहीं हों। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि इस “ऐतिहासिक कानून” में भ्रष्टाचार के मामलों को तेजी से निपटारा सुनिश्चित करने का प्रावधान है। उन्होंने आगे कहा कि किसी भी भ्रष्टाचार के मामले में, हम सामान्य रूप से दो साल में फैसले के लिए दिशानिर्देश लाएंगे। इस कानून के जरिए सरकार का उद्देश्य भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का है साथ ही अच्छे काम का माहौल सुनिश्चित करना है।

चर्चा के दौरान लोकपाल की नियुक्ति में देरी के मुद्दे को भी कुछ सांसदों ने उठाया, इस पर जितेन्द्र सिंह ने कहा कि देश में अभी तक लोकपाल की नियुक्ति नहीं हुई है। इस संबंध में प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने आगे कहा कि लोकपाल में देरी का कारण सत्तारूढ़ दल नहीं बल्कि कांग्रेस पार्टी है। सदन में विपक्ष के नेता के लिए जरूरी संख्या में सीटें उसके पास नहीं हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता लोकपाल चयन पैनल के सदस्य हैं। सरकार ने लोकपाल की नियुक्ति से संबंधित बैठकों में सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के नेता को शामिल करने की मांग की थी। बहस में हिस्सा लेने वाले कई सदस्यों ने भ्रष्टाचार को रोकने के लिए चुनावी सुधारों की आवश्यकता पर बल दिया।

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