Tuesday, March 10, 2026
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ऑनलाइन शॉपिंग के बंपर छूट पर लगेगी रोक, सरकार ने मसौदा बनाया

(ताज़ाख़बर36गढ़) अमेजन-फ्लिपकार्ट जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों की ओर से मिलने वाली बंपर छूट पर रोक लग सकती है। सरकार ने बाजार के संतुलन को बनाए रखने के लिए इन कंपनियों पर नियंत्रण को लेकर राष्ट्रीय नीति का मसौदा तैयार किया है। मसौदे में एफडीआई नियमों के सही तरीके से पालन को लेकर भी नियम-कायदे शामिल किए गए हैं।

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मसौदे के अनुसार, ई-कॉमर्स मंच चलाने वाली कंपनियां या उनके समूह की कोई कंपनी उस मंच के जरिये बेचे जाने वाले किसी उत्पाद या सेवा की कीमत या बिक्री को प्रत्यक्ष या परोक्ष तौर पर प्रभावित करने का कोई काम नहीं कर सकेंगी। समझा जाता है कि इससे ऑनलाइन खरीदारी के लिए दी जाने वाली बंपर छूटों पर पूरी तरह रोक लग सकेगी और कारोबार की दृष्टि से इसका फायदा छोटे दुकानदारों को हो सकता है।

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यह प्रस्ताव नीति के मसौदे का हिस्सा है जिसे सभी हितधारकों के बीच चर्चा के लिए रखा गया है। उपभोक्ताओं के डाटा का गलत इस्तेमाल रोकने के लिए भी मसौदे में सुझाव दिया गया है। इसके तहत ई-कॉमर्स कंपनियों को भारतीय ग्राहकों का डाटा देश में ही संरक्षित रखने के लिए कहा जाएगा। हालांकि इसे पूरी तरह लागू किए जाने को लेकर कंपनियों को दो साल का समय दिया जाएगा। समिति ने प्रतिस्पर्धा आयोग से सिफारिश की है कि बाजार के संतुलन को बनाए रखने के लिए बदलावों पर विचार करे।

ई-सर्विस कंपनियां भी शामिल
अमेजन, फ्लिपकार्ट, पेटीएम मॉल और स्नैपडील जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों के अलावा स्विगी, अर्बन क्लैप, पेटीएम और पॉलिसी बाजार जैसी ई-सेवा उपलब्ध कराने वाली वेबसाइट्स को भी मसौदे में शामिल किया जाएगा।

थोक सामान खरीद पर रोक
मसौदे में ई-कॉमर्स कंपनियों को थोक में ब्रांडेड सामान बेचने पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। इसके तहत मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद सहित अन्य कीमती सामानों की थोक खरीद पर पाबंदी लगाई जा सकती है, क्योंकि इससे कीमतों में गड़बड़ी होती है।

घरेलू कंपनियों को समान अवसर
समिति ने घरेलू कंपनियों को समान अवसर देने लिए भारत में निर्मित उत्पादों की बिक्री के प्रोत्साहन की भी बात कही है। इसके तहत भारतीयों के स्वामित्व वाली ई-रिटेल कंपनियों को शत-प्रतिशत भारत में बने उत्पादों का अपना खुद का सीमित मात्रा में स्टाक बनाकर उसकी बिक्री करने की अनुमति होगी।

एफडीआई नियम बदलेगा
यदि कोई ई-कॉमर्स कंपनी खुद का माल गोदाम बनाकर उसके आधार पर ग्राहकों को खुदरा बेचती है तो उनमें 49% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश किया जा सकेगा। अभी इस तरह के कारोबार में विदेशी निवेश पर रोक है और केवल खुदरा मार्केटप्लेस कारोबारी मॉडल में ही विदेशी निवेश की अनुमति है।

ये नियम भी बनेंगे
-ई-शॉपिंग पर मिलने वाले डिस्काउंट के लिए समय-सीमा निर्धारित होनी चाहिए।
-उपभोक्ताओं के पास बार-बार आने वाले अनचाहे वाणिज्यिक ई-मेल पर लगाम।
-ग्राहकों का डाटा कंपनियां बाहर नहीं ले जा सकेंगी और ग्राहकों की मर्जी के बिना उसका व्यावसायिक इस्तेमाल नहीं होगा।
-सरकार इस डाटा का उपयोग राष्ट्रीय सुरक्षा और नीतियों को तैयार करने में कर सकेगी।

कैट के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने बताया कि सरकार के इस कदम से बाजार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा होगी और खुदरा कारोबारी भी मजबूत होंगे। अगर ऑनलाइन उत्पादों पर छूट का खेल खत्म हो गया तो वालमार्ट जैसी कंपनियां अपना कारोबार समेटने में देर नहीं लगाएंगी।

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