Sunday, March 15, 2026
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छत्तीसगढ़: नगरीय क्षेत्रों में जाति प्रमाण पत्र जारी करने के संबंध में राज्य शासन द्वारा दिशा-निर्देश जारी…

बिलासपुर। प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के जाति और मूल निवास प्रमाण पत्र बनाने के संबंध में नगर पंचायत, नगरपालिका परिषद अथवा नगर निगम की सामान्य सभा द्वारा की गई उद्घोषणा को भी साक्ष्य के रूप में मान्य कर उसके आधार पर नियमानुसार सक्षम प्राधिकारी द्वारा जाति और मूल निवास प्रमाण पत्र जारी किए जाएंगे।

गौरतलब है कि शासन के समक्ष यह बात ध्यान में आयी है कि छत्तीसगढ़ में निवासरत बहुत से आवेदकों के विभिन्न शैक्षणिक एवं राजस्व अभिलेखों में अधिसूचित वास्तविक जाति के स्थान पर धर्म का नाम अंकित होने एवं पूर्व के अभिलेखों में उनकी जाति स्पष्ट रूप से अंकित नहीं होने के कारण तथा राज्य में छोटे-छोटे ग्राम नगर पंचायतों में परिवर्तित होने से उन्हें जाति प्रमाण पत्र बनवाने में कठिनाई हो रही है। इन सभी मामलों के निराकरण के लिए आज यहां सामान्य प्रशासन विभाग, मंत्रालय (महानदी भवन) से सभी कलेक्टरों एवं नगरीय निकायों को पत्र जारी कर यह स्पष्ट किया गया है कि छत्तीसगढ़ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (सामाजिक प्रास्थिति के प्रमाणीकरण का विनियमन) नियम 2013 के उपखण्ड-11 में यह प्रावधान किया गया है जहां जाति को प्रमाणित करने हेतु कोई दस्तावेजी साक्ष्य उपलब्ध न हो वहां ग्राम सभा द्वारा आवेदक की जाति के संबंध में पारित संकल्प मान्य होगा। इस संबंध में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा 26 अगस्त 2013 को निर्देश जारी किए गए हैं।

इसी तरह नगर पंचायत के निवासियों जिनके पास उनकी जाति के संबंध में कोई साक्ष्य नहीं है तथा उन्हें जाति प्रमाण पत्र बनवाने में कठिनाई हो रही है। इस संबंध में छत्तीसगढ़ जनजाति सलाहकार परिषद की बैठक 8 अगस्त 2015 में की गई अनुशंसा पर नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा 14 दिसम्बर 2015 को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इसके अनुसार ग्राम सभा के साथ-साथ नगर पंचायत और नगर पालिका परिषद के पारित संकल्प को भी साक्ष्य माना जाएगा।

नगरपालिक निगमों के लिए भी उक्त निर्देशों के अनुरूप ही नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा 11 जनवरी 2018 को निर्देश जारी किए गए हैं, जिसमें नगरपालिक निगमों (शहरी क्षेत्रों) में निवासरत व्यक्तियों और परिवारों की पहचान करने एवं उनकी जाति तथा मूल निवास के संबंध में लोक तथा निजी दस्तावेजों में साक्ष्य उपलब्ध न होने पर सामान्य सभा द्वारा सर्वसम्मति से की गई उद्घोषणा के आधार पर कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए हैं।

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