छत्तीसगढ़

बिलासपुर: एनटीपीसी सीपत ने पीआरएसआई राष्ट्रीय पुरस्कार 2022 में चार पुरस्कार जीते…

सामाजिक दायित्व को लागू करने वाले सर्वश्रेष्ठ पीएसयू के रूप में तीसरा स्थान हासिल किया। कंपनी के दृष्टि एवं लक्ष्य, के अनुसार बिजली उत्पादन के साथ ही सीएसआर के तहत लाखों

बिलासपुर। एनटीपीसी सीपत को पीआरएसआई राष्ट्रीय पुरस्कार- 2022 में चार विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए अवार्ड से सम्मानित किया गया। इनमें सीएसआर वर्ग में 2, जैव विविधता संरक्षण को प्रदर्शित करता कॉफी टेबल बुक के लिए1, और स्वास्थ्य के क्षेत्र में 1 कुल 4 अवार्ड्स से सम्मानित किया गया। 

एनटीपीसी सीपत ने नैगम सामाजिक दायित्व को लागू करने वाले सर्वश्रेष्ठ पीएसयू के रूप में तीसरा स्थान हासिल किया। कंपनी के दृष्टि एवं लक्ष्य, के अनुसार बिजली उत्पादन के साथ ही सीएसआर के तहत लाखों भारतीयों के जीवन को रोशन करते हुए आसपास के प्रभावित गाँवों में सामुदायिक विकास, बुनियादी ढांचागत विकास, शिक्षा, सामुदायिक स्वास्थ्य और स्वच्छता, शुद्ध पेयजल, जैसे प्राथमिक सुविधाओं का विकास एवं विस्तार के प्रति समर्पित है।

कॉफी टेबल बुक में एनटीपीसी सीपत ने तीसरा स्थान हासिल किया। इस  कॉफी टेबल बुक  में एनटीपीसी सीपत संयंत्र, नगर परिसर एवं आसपास के क्षेत्रों में संरक्षित विभिन्न प्रजाति के पेड़ पौधों, पक्षियों, एवं छोटे-बड़े जीव जंतुओं के संग्रहण को दर्शाया गया है।

इसके अलावा, सीएसआर श्रेणी में, एनटीपीसी सीपत को महिला विकास के लिए सर्वश्रेष्ठ सीएसआर परियोजना के लिए तीसरे स्थान पर पुरस्कृत किया गया। एनटीपीसी सीपत की बालिका सशक्तिकरण अभियान 2022 के तहत आसपास के 10-12 वर्ष के  120 बालिकाओं को आवासीय प्रशिक्षण प्रदान कर सशक्त बनाया गया और उनके अंदर छुपी प्रतिभाओं को निखारने का प्रयास किया गया।

इसी तरह एनटीपीसी सीपत ने चिकित्सा और स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए उत्कृष्ट पहल के लिए तीसरा स्थान भी हासिल किया। 1 जून 2022 को मातृ एवं शिशु देखभाल पर विशेष ध्यान देने वाली एक मेडिकल मोबाइल वैन को एनटीपीसी सीपत के कार्यकारी निदेशक घनश्याम प्रजापति ने झंडी दिखाकर रवाना किया। यह मोबाइल वैन सीपत, एवं  आसपास के 36 प्रभावित गांवों में संचालित की जा रही है। मोबाइल मेडिकल वैन गरीब आबादी के एक बड़े हिस्से तक पहुंचती है जिसमें बड़ी संख्या में बच्चे और महिला लाभार्थी शामिल हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य मातृ-शिशु मृत्यु दर को कम करना और स्वास्थ्य में सुधार के साथ-साथ गर्भवती और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता पैदा करना है।