Wednesday, January 14, 2026
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बिलासपुर जिले के लोकबंद ग्राम का मामला: स्वतंत्र ग्राम पंचायत की मांग नहीं तो त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का बहिष्कार की चेतावनी…

बिलासपुर। जिले के करगीखुर्द गांव के अंतर्गत आने वाले आश्रित गांव लोकबंद के ग्रामीण वर्षों से स्वतंत्र ग्राम पंचायत के दर्जे की मांग कर रहे हैं। लेकिन प्रशासनिक उपेक्षा और आवश्यक सुविधाओं की कमी के चलते ग्रामीण अब त्रस्त होकर आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2025 का बहिष्कार करने की चेतावनी दे चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी बुनियादी समस्याओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे उनका दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है।

लोकबंद के ग्रामीणों का कहना है कि आश्रित ग्राम होने के कारण उन्हें सड़क, पानी, बिजली, स्कूल और अस्पताल जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव झेलना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि करगीखुर्द ग्राम पंचायत के अधीन रहने से उनकी समस्याएं प्राथमिकता में नहीं आतीं और वे विकास कार्यों से वंचित रह जाते हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि 2011 की जनगणना के अनुसार लोकबंद की जनसंख्या लगभग 890 थी, जो अब बढ़कर लगभग 1350 हो गई है। नियमानुसार, एक हजार से अधिक आबादी वाले गांव को स्वतंत्र ग्राम पंचायत का दर्जा मिलना चाहिए। इस मांग को लेकर ग्रामीण कई बार जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंप चुके हैं, लेकिन अब तक उनकी मांग को अनसुना किया गया है।

पिछले दिनों लोकबंद के ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर एक बार फिर ज्ञापन सौंपा और स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि एक महीने के भीतर उनकी मांग पूरी नहीं होती, तो वे आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2025 का पूर्ण बहिष्कार करेंगे। ग्रामीणों का कहना है कि यह उनका आखिरी प्रयास है, और अगर अब भी उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो वे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने से मना कर देंगे।

यह स्थिति केवल लोकबंद के लिए नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए चिंताजनक है। एक ओर प्रशासनिक नीतियों में गांवों के विकास की प्राथमिकता की बात होती है, वहीं दूसरी ओर वर्षों से लंबित मांगों को अनदेखा किया जा रहा है। लोकबंद जैसे गांवों के लिए स्वतंत्र पंचायत का दर्जा मिलने से न केवल उनकी समस्याओं का समाधान होगा, बल्कि क्षेत्रीय विकास को भी गति मिलेगी।

लोकबंद के ग्रामीण अब भी आशावान हैं कि उनकी आवाज सुनी जाएगी और उन्हें स्वतंत्र ग्राम पंचायत का दर्जा मिलेगा। उनकी चेतावनी और चुनाव बहिष्कार का ऐलान प्रशासन के लिए एक गंभीर संदेश है। यदि प्रशासन इस मामले में शीघ्र कदम नहीं उठाता, तो यह न केवल ग्रामीणों के विश्वास को कमजोर करेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र के विकास पर भी असर डालेगा।

लोकबंद गांव के ग्रामीणों की यह मांग न्यायसंगत है और प्रशासन को इसे प्राथमिकता से हल करना चाहिए। एक ओर लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के लिए लोगों की भागीदारी आवश्यक है, तो दूसरी ओर प्रशासन का दायित्व है कि वह जनता की समस्याओं का समाधान करे। अब देखना यह है कि प्रशासन इस चेतावनी को कितनी गंभीरता से लेता है और लोकबंद के ग्रामीणों की वर्षों पुरानी मांग पूरी होती है या नहीं।

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