Friday, August 29, 2025
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अनुरागी धाम में 9 दिवसीय अखंड नवधा रामायण का भव्य समापन: आस्था, संस्कृति और समर्पण का संगम, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय श्रद्धालुओं की भागीदारी…

बिलासपुर। धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन किसी भी समाज की जड़ों को मजबूत करते हैं और ऐसा ही एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया गया ग्राम मोतिमपुर में। बिलासपुर मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर स्थित इस पवित्र स्थान पर 9 दिवसीय अखंड नवधा रामायण का आयोजन संपन्न हुआ। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बना, बल्कि क्षेत्रीय संस्कृति और समर्पण का प्रतीक भी बन गया।

आस्था का महासंगम
7 जनवरी को विशाल भंडारे और कन्या भोज के साथ इस महायज्ञ का समापन हुआ। इस आयोजन ने न केवल आसपास के ग्रामीणों, बल्कि देशभर के श्रद्धालुओं को आकर्षित किया। अनुरागी धाम, जो बाबा अनुरागी की समाधि के कारण प्रसिद्ध है, ने एक मेले का स्वरूप धारण कर लिया था। भक्ति, आराधना और सामूहिक भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या ने यह साबित कर दिया कि यह स्थान आस्था और भक्ति का नया केंद्र बनता जा रहा है।

विशाल भंडारा और सम्मान समारोह
समापन समारोह में सुबह आरती और सहस्त्रधारा के साथ शुरुआत हुई। इसके बाद कन्या भोज और दोपहर 1 बजे विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने न केवल भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया, बल्कि आयोजन समिति के स्नेह और समर्पण को भी सराहा। अनुरागी धाम सेवा समिति ने हर श्रद्धालु का स्वागत करते हुए उन्हें भक्ति के साथ भोजन कराया।

समारोह के दौरान बिल्हा क्षेत्र के विधायक धरमलाल कौशिक विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित हुए। उन्होंने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए अनुरागी धाम को आस्था का जीवंत स्थल बताया। उन्होंने कहा कि यह स्थान न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि पर्यावरण, पर्यटन और ग्रामीण संस्कृति को भी बढ़ावा दे रहा है।

देश-विदेश से जुटे भक्त
इस कार्यक्रम में देशभर से श्रद्धालु शामिल हुए। मुंबई, पुणे, दिल्ली, बेंगलुरु, गुजरात, और कोलकाता जैसे शहरों से आए भक्तों ने इस आयोजन को विशेष बना दिया। यहां तक कि विदेशों से भी बाबा अनुरागी के अनुयायी इस पवित्र आयोजन में सम्मिलित हुए। वृंदावन से पुरुषोत्तम महाराज और चित्रकूट धाम से राधेश्याम महाराज सहित अन्य संतों ने अपनी उपस्थिति से आयोजन की गरिमा बढ़ाई।

अनुरागी धाम: एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक स्थल
अनुरागी धाम केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि एक ऐसा केंद्र बनता जा रहा है जहां आध्यात्म, पर्यावरण और संस्कृति का संगम देखने को मिलता है। यहां रंग-बिरंगे फूलों की बगिया, शांत नदियों का संगम, और ग्रामीण मेले की पारंपरिक झलक श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। बाबा अनुरागी की समाधि ने इस स्थल को अद्वितीय बना दिया है।

आयोजन समिति की भूमिका
इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में अनुरागी धाम सेवा समिति की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने न केवल भंडारे और नवधा रामायण का संचालन किया, बल्कि पूरे कार्यक्रम में अनुशासन और श्रद्धालुओं की सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा। समिति ने नवधा गायन टोली, साधु-संतों और ग्रामीण सहयोगियों का सम्मान कर उनकी सेवाओं को सराहा।

समाप्ति पर एक नई शुरुआत
यह आयोजन केवल समाप्ति का नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत का प्रतीक है। अनुरागी धाम ने एक बार फिर से यह सिद्ध किया है कि आस्था, भक्ति और सेवा की भावना मानवता को एकजुट करती है। यह स्थल आने वाले समय में न केवल धार्मिक, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक विकास का बड़ा केंद्र बनेगा।

एक अद्वितीय आयोजन, एक अविस्मरणीय अनुभव।

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