बिलासपुर

एसईसीएल में भू अर्जन के बदले नौकरी घोटाला, पीड़ित परिवारों की दर्दनाक दास्तां…

बिलासपुर। एसईसीएल (साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) में भूमि अधिग्रहण के बदले नौकरी देने की प्रक्रिया में गंभीर घोटाले सामने आए हैं। वास्तविक हितग्राही आज भी दर-दर भटक रहे हैं, जबकि अपात्रों को फर्जीवाड़े से नौकरी दी जा रही है। कोरबा के दो पीड़ित परिवारों ने बिलासपुर प्रेस क्लब में पत्रकारों के सामने अपनी दर्दनाक दास्तां सुनाई।

जीवित व्यक्ति को मृत बताकर बेची गई नौकरी

कोरबा जिले के ग्राम जुनाडीह निवासी मुकरदम ने बताया कि उनके पास खसरा नंबर 440/4 और 441/1 में कुल 5 डिसमिल जमीन थी, जिसके एवज में उनके परिवार को नौकरी की पात्रता थी। इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने एसईसीएल गेवरा प्रोजेक्ट में कार्यरत प्रमोद कुमार शर्मा और अरुण पांडे को अपने पुत्र की नौकरी के लिए 20,000 रुपये दिए।

कुछ समय बाद प्रमोद कुमार शर्मा, मुकरदम के घर से यह कहकर मूल ऋण पुस्तिका ले गया कि यह नौकरी के लिए जरूरी है। बार-बार पूछने पर नौकरी में देरी का बहाना बनाया जाता रहा। जब मुकरदम खुद एसईसीएल कार्यालय पहुंचे, तो पता चला कि उनकी मृत्यु दिखाकर उनकी जगह प्रदीप कुमार पिता कांशी प्रसाद शर्मा को नौकरी दे दी गई।

चौंकाने वाली बात यह है कि मुकरदम आज भी जीवित हैं और पेंशन प्राप्त कर रहे हैं। प्रदीप कुमार शर्मा का उनके परिवार से कोई संबंध नहीं है। जातीय भिन्नता भी स्पष्ट है – मुकरदम मुसलमान हैं, जबकि प्रदीप शर्मा ब्राह्मण हैं। सवाल उठता है कि

  • जीते-जी मृत्यु प्रमाण पत्र कैसे बना?
  • फौती नामांतरण कैसे हुआ?
  • फर्जी तरीके से नौकरी कैसे दी गई?

जब इस घोटाले का पर्दाफाश हुआ, तो मुकरदम को धमकियां मिलने लगीं। उन्होंने पुलिस से लेकर डीपी, सीएमडी और एसईसीएल तक शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। आरटीआई के तहत कागजात मांगे गए, लेकिन जानकारी देने से इनकार कर दिया गया।

फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी दिलाने का बड़ा खेल

कोरबा के ईश्वर दत्त कश्यप ने भी पत्रकारों के सामने खुलासा किया कि कैसे एसईसीएल में भ्रष्टाचार चरम पर है। उन्होंने बताया कि

  • उनकी बहन सरोज बाई की भूमि (खसरा नंबर 378/12, 81 डिसमिल) के बदले उनके पति रामचरण को नौकरी दी गई थी।
  • लेकिन अधिकारियों ने षड्यंत्र करके उसी भूमि के आधार पर एक और नियुक्ति पत्र निकाल दिया।
  • फर्जी नियुक्ति पत्र में खसरा नंबर 387/12 दर्ज किया गया, जबकि यह जमीन एसईसीएल ने अर्जित ही नहीं की थी।

सबसे बड़ा सवाल:

  • जिस विजय कुमार को सरोज बाई का बेटा बताया गया, उसकी उम्र उसकी कथित मां से कम है।
  • विजय कुमार का सगा भाई कोरबा के सरकारी अस्पताल में कार्यरत है, जिसकी सेवा पुस्तिका में उसकी असली मां का नाम दर्ज है।
  • विजय कुमार के पिता एक सेवानिवृत्त सरकारी शिक्षक हैं, जिनकी सेवा पुस्तिका में उनकी पत्नी का नाम सावित्री कौशिक लिखा है।

शासन-प्रशासन की चुप्पी और निष्क्रियता

इतने पुख्ता सबूतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। पीड़ित परिवारों ने

  • प्रधानमंत्री कार्यालय, पुलिस विभाग और विभागीय अधिकारियों तक शिकायत की, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
  • हर बार गुमराह करने वाले जवाब देकर फाइलें दबा दी गईं।

एसईसीएल में नौकरियों की खरीद-फरोख्त का गोरखधंधा

यह मामला केवल दो पीड़ित परिवारों तक सीमित नहीं है। एसईसीएल में भू अर्जन के बदले नौकरी देने की प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है। हकदार परिवार नौकरी के लिए भटक रहे हैं, जबकि पैसे और सिफारिश के दम पर अयोग्य लोग नौकरी पा चुके हैं।

अब सवाल यह है:

  • क्या शासन-प्रशासन दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करेगा?
  • क्या पीड़ित परिवारों को न्याय मिलेगा?
  • क्या फर्जी नियुक्तियों को रद्द किया जाएगा?

अगर इस गंभीर मामले की निष्पक्ष जांच हुई, तो कई बड़े नामों की संलिप्तता उजागर हो सकती है। पीड़ित परिवार अब भी न्याय की आस में दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन क्या सरकार और प्रशासन उनकी आवाज़ सुनेगा?

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