Thursday, January 15, 2026
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भूजल संकट पर कलेक्टर की चिंता: अग्रवाल ने कहा भूजल स्तर में गिरावट का बड़ा कारण जल का अंधाधुंध दोहन…

बिलासपुर। जल संकट की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर संजय अग्रवाल ने जिला कार्यालय के मंथन सभाकक्ष में सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। इस दौरान उन्होंने जिले में चल रही सिंचाई परियोजनाओं की स्थिति की समीक्षा करते हुए अधूरी योजनाओं को भूजल स्तर में गिरावट का एक प्रमुख कारण बताया।

कलेक्टर ने स्पष्ट रूप से कहा कि अधूरी पड़ी सिंचाई परियोजनाएं न केवल जल स्रोतों के समुचित उपयोग में बाधा बन रही हैं, बल्कि भूजल के तेजी से नीचे जाने का कारण भी बन रही हैं। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि इन अधूरी परियोजनाओं को शीघ्रता से पूरा किया जाए ताकि सतही जल का संरक्षण हो सके और बारिश के पानी का अधिकतम संग्रहण सुनिश्चित किया जा सके।

उन्होंने जल संसाधन विभाग की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि सिंचाई विभाग को सतही जल संरक्षण के लिए अधिक सक्रिय और सजग रहना होगा। डेम, एनिकट और अन्य जल संरचनाओं की मरम्मत कार्यों को प्राथमिकता पर लेते हुए जल्द से जल्द पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।

कलेक्टर ने कहा कि भूजल स्तर में गिरावट का बड़ा कारण जल का अंधाधुंध दोहन है। इसे रोकने के लिए वर्षा जल संग्रहण और पुनर्भरण संरचनाओं जैसे नाला बंधान और पर्कोलेशन टैंक का निर्माण आवश्यक है। उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि हर गांव में कम से कम एक पर्कोलेशन टैंक अनिवार्य रूप से बने, ताकि गांव का पानी गांव में ही रुक सके।

बैठक में उन्होंने सभी सब इंजीनियर और एसडीओ को स्पष्ट निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से किसी भी स्थिति में समझौता न हो। साथ ही निर्माण स्थलों की सतत निगरानी की जाए ताकि कार्य समयबद्ध और मापदंडों के अनुरूप हो। उन्होंने कहा कि पौधरोपण और जल संरक्षण को सभी विकास कार्यों का अभिन्न हिस्सा बनाया जाए।

कलेक्टर ने किसानों को भी इस अभियान से जोड़ने पर बल दिया और फसल चक्र परिवर्तन की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि ऐसी फसलें अपनाई जानी चाहिए जिनमें जल की खपत कम हो, ताकि जल संकट से निपटा जा सके।

इस समीक्षा बैठक में जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता मधु चंद्रा सहित सभी एसडीओ और सब इंजीनियर उपस्थित थे। बैठक का मुख्य उद्देश्य जल संरक्षण के प्रयासों को गति देना और विभागीय कामों में पारदर्शिता व गुणवत्ता सुनिश्चित करना था।

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