Saturday, December 13, 2025
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“एक पेड़ माँ के नाम”: कौशल्या देवी ने दी मातृशक्ति और पर्यावरण प्रेम की प्रेरक सीख…

बिलासपुर के रामा वर्ल्ड मंदिर प्रांगण में एक अद्भुत दृश्य देखने को मिला, जब छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की धर्मपत्नी कौशल्या देवी ने पर्यावरण संरक्षण को मातृशक्ति से जोड़ते हुए “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान की शुरुआत में सक्रिय भागीदारी निभाई। यह कार्यक्रम न केवल हरियाली के प्रति जागरूकता लाने की एक सार्थक पहल था, बल्कि मातृत्व के सम्मान को वृक्षों के प्रतीक से जोड़ने वाला एक भावनात्मक संदेश भी लेकर आया।

🌱 मातृत्व और प्रकृति का संगम

कौशल्या देवी ने इस कार्यक्रम के तहत एक सुंदर पौधे का विधिवत पूजा-अर्चना के साथ रोपण किया, जिसे “माँ कौशल्या सम्मान” नाम दिया गया। इस भावपूर्ण क्षण में उन्होंने कहा –

“एक माँ जितनी दया, त्याग और संरक्षण देती है, ठीक उसी तरह एक वृक्ष भी धरती को जीवन देता है।”

उनके इस वक्तव्य ने उपस्थित जनसमूह को भीतर तक प्रभावित किया और मातृशक्ति के संरक्षणकारी स्वरूप को प्रकृति के रूप में देखने की दृष्टि दी।

🌳 आयोजक और सहभागिता

इस आयोजन की अध्यक्षता रामा ग्रुप के संजय अग्रवाल एवं उनकी माताजी कलावती देवी ने की। उन्होंने कहा –

“हर वृक्ष, हर माँ की तरह जीवनदायिनी शक्ति लेकर आता है।”

कार्यक्रम में स्थानीय महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों, युवा छात्रों एवं समाजसेवियों की सहभागिता ने इस पहल को एक व्यापक सामाजिक आंदोलन का रूप दे दिया।

🌏 एक संकल्प, एक बदलाव

समूह ने इस मौके पर यह संकल्प लिया कि हर वर्ष कम-से-कम एक पौधा अवश्य लगाया जाएगा, और उसकी देखभाल उसी ममता से की जाएगी जैसे एक माँ अपने बच्चे की करती है। इस विचार ने “एक पेड़ माँ के नाम” कार्यक्रम को केवल पौधारोपण तक सीमित न रखते हुए, एक नैतिक जिम्मेदारी और भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक बना दिया।

🌼 मुख्यमंत्री की पत्नी की सक्रिय भागीदारी का संदेश

कौशल्या देवी की उपस्थिति और सक्रिय भूमिका ने यह सिद्ध कर दिया कि जब समाज की मातृशक्ति जागरूक होती है, तो हरियाली केवल पर्यावरण की जरूरत नहीं बल्कि संस्कृति और संस्कार का हिस्सा बन जाती है

इस कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश जन-जन तक पहुंचा कि मातृप्रेम और पृथ्वीप्रेम अलग नहीं, बल्कि एक ही भावना के दो रूप हैं। वृक्षों को माँ का दर्जा देकर यदि समाज उन्हें सहेजे, तो भविष्य की पीढ़ियों को न केवल शुद्ध पर्यावरण मिलेगा बल्कि एक संस्कारी सोच भी विरासत में मिलेगी।


“एक पेड़ माँ के नाम” अब सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक विचार है – जो कहता है:
“माँ को सम्मान दो, धरती को जीवन दो।” 🌍💚

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